कागद राजस्थानी

रविवार, 29 अप्रैल 2012

 संसद में राजस्थानी री गूंज
==================
 
श्री अर्जुन राम जी मेघवाळ सा संसद में बोल्या है जका
 ऐ दोन्यूं दूहा म्हारा लिख्योडा़ है -
[1]
रोटी बेटी आपणीं , भाषा अर बोवार ।
राजस्थानी है भाया , आडो क्यूं दरबार ॥
[2]
मायड़भाषा भली घणीं ,ज्यूं व्है मीठी खांड ।
परभाषा नै बोलता , जाबक दीखां भांड ॥

 

 संसद में राजस्थानी री गूंज

rajasthani language in lok sabha by arjun ram meghwal mp bikaner

http://youtu.be/AukBlbkmaHw

 संसद में राजस्थानी री गूंज

 


श्री अर्जुन राम जी मेघवाळ सा संसद में बोल्या है जका ऐ दोन्यूं दूहा म्हारा लिख्योडा़ है -
[1]
रोटी बेटी आपणीं , भाषा अर बोवार ।
राजस्थानी है भाया , आडो क्यूं दरबार ॥
[2]
मायड़भाषा भली घणीं ,ज्यूं व्है मीठी खांड ।
परभाषा नै बोलता , जाबक दीखां भांड ॥

http://youtu.be/6mykudrudmM

रविवार, 1 अप्रैल 2012

प्यार रा दो चितराम


मूंघीवाड़ै मेँ प्यार रा दो चितराम
-एक-
छोरा बोल्या
इण मूंघीवाड़ै में
कोनीं पड़ै पार
मत करो प्यार
आगै बध्या हो तो
लारै हटणों पड़सी
प्यार खातर छेकड़
नटणों पड़सी !

-दोय-
छोरयां बोली
इण मूंघीवाड़ै में
कोनीं पड़ै पार
अब करो प्यार
अब ताईं रो मून
अब तोड़णों पड़सी
इश्क रो गाडो
अब जोड़नो पड़सी !

धंवर डाकण

[<0>]धंवर डाकण[<0>]

हाल तो बेहाल है
मुरधर सांकड़ै
कुळछणो बायरियो
हेम सूं घाल भायला
बगै थड़ी करतो चौगड़दै
रूप धार धंवर रो !

उतराधी पून पापण
बण डांफर
करै रमतां
खावै गुळाच्यां
मुरधर री छाती
घालै छेकला
हेम री साथण
धंवर डाकण
बैठगी ले गोदयां
त्या तकात रोक्यां
मुरधर रा म्होबी
धोरयां रै ठसगी फेफ्पी !

फूस-पानका
रूंख-झाड़का
आला-सीला
तप्यां तावड़ो
करै वसीला
भुरट-मुरट
सीवण-धामण
बूई-बूर
सोधता सूरज
मरग्या झूर
धंवर घुमायो
भूंडो भूण
लेयगी जूण
कर मजबूर
अळगी दूर !

आ धंवर धूजणीं
छंटसी देखी
सूरज बापजी
आसी देखी
गोदयां ले मुरधर नै
बिलमासी देखी
छुड़ा चा-पकौड़ी
छाछ-राबड़ी
खड़ासी देखी
धोरां री गोदयां
धोरी धरमी
चढासी देखी !

सज्जण-दुरजण

सज्जण चालै साथ में,दुरजण चालै लार ।
नुगरा चालै लुक परा,लोभी डोबै धार ।।
हेत पांगरै धाप में,भूख पांगरै राड़ ।
भाई बांटै खेत नै,काको बांधै बाड़ ।।

छकड़ी

[<>]छकड़ी [<>]

माया रचाई खोटी बाबा ।
पूंजी कमाई मोटी बाबा ।।
मेहनत करने वाले हारे ।
जुटी नहीं वहां रोटी बाबा।।
लोहा बेचे भाव सोने के ।
कैसी हुई कसोटी बाबा ।।
बिना बोटोँ के जीता नेता ।
खूब बैठाई गोटी बाबा।।
उनका भाग्य संवरा संवरा।
मेरी किस्मत छोटी बाबा।।
खेत आपका सांड ये चरतै ।

अपनी दिखाओ सोटी बाबा।।

भोत अंधारो है

♥ भोत अंधारो है ♥
होया करै जेड़ो
है दिन
चोगड़दै पण भंवै
साव अंधारो
सुरजी नै चिडावंतो !

कुण देखै सूई
जठै लुकग्या हाथ
दिखै ई नीं
खुद रै पगां रो कादो
भोत अंधारो है
थकां सुरजी !

है तो सरी सुरजी
आभै में पकायत
है कठै पण ठाह नीं
फिरग्या आडा
जळबायरा बादळिया !

इयां तो
ढबै नीं सुरजी
निकळसी एक दिन
बादळियां नै फटकार
पळपळावंतो
आभै रै सूंवै बिचाळै !

घोट

.
[<>] लुक्को लाडी [<>]

नेता जी रै चढगी घोट ।
दादी बोली घालो बोट ।।
डेडर भांत बोल्या नेता ।
आज काल में पड़सी बोट ।।
जात पांत रा करसी खेल ।
मरजादा पर धरसी चोट ।।
दादी बोली लुक्को लाडी ।
ठाकुर जी री ले ल्यो ओट।।
खोट ढूंढसी आपां मांय ।
नेता जी में कोनीं खोट ।।
अळगा होय आपां बैठ्या ।
नेता सगळा ऐकम जोट ।।
कुरसी माथै जम परा ऐ ।
भीतर राख सेकसी रोट ।।
देस बचाणो तन्नै लाडी ।
हाथां ले लै भाया सोट ।।

प्रीत

>।< प्रीत रो चितराम >।<

प्रीत-1


प्रीत पांगळी
चालै हळवां
पकड़ आंगळी
कथी अलेखूं
मथी कहाणीं
निकळी कूड़
पूगी भागती
फगत ऐकली
पगां उभाणीं ।

हंसोकड़ी कविता

*आज हंसोकड़ी कविता*
[::]=[::]=[::]=[::]=[::]


[::]कवि अर कवियाणीं[::]
कविता सुणण खातर
कवि सम्मेलन में
कवि साथै
कवियाणी भी आई
रात नै बारा बजे
कवि जी री बारी आई
कवियाणी खड़ी होय
ताळी बजाई !

कवि जी मंच चड़्या

कविता सुणाई
पै'ली ई ओळी सुणाई
"रात पूनम की थी"
कवियाणी बोली
थमज्या-कविता डाट
पैली बता
आ पूनम कुण है
कठै री है किरड़कांट
जकै सागै थूं
रात बिताई है
बीं नै तो देख ई लेस्यूं
मंच छोड
मांचै पर चाल
आज तन्नै भी देख लेस्यूं !

कवि बोल्यो

बा कोई कोनीं
पूनम तो बापड़ी
म्हारी कविता री पात्र है
कवियाणी बोली
बा तो है जकी है
बीं नै जावण दे
म्हैं तो तन्नै भी जाणगी
थूं कित्तोक सुपात्र है

रणभेरी

[<>>रणभेरी बाजगी [<>]
ठंड रा दिन है
थे फोड़ा देखता
थे आवंता भी तो
कांईं करता
करणों तो म्हांनै ई हो
म्हे कर लियो
बैठकड़ी ही ऐक
जकी करणीं ही
थांरै कैयै मुजब
म्हे कर ली थां सारु
बोला बाला !

थे तो जाणों ई हो
हाकां में कांईं सार है
सार तो असवार में है
घोड़ां में कांईं सार ?
आप भी तो घोड़ा ई हो
आप तो दौड़ो दड़ाछंट
ठिकाणैं माथै तो हरमेस
पूग्या करै असवार
थांनै नीं-पूगणों म्हांनै है
पूग जास्यां ओ
घोड़ा तो बांअंडै ई बंधै
ठाणां माथै परबारा
थ्यावस राखो
बगत आयां
थांन्नै ई बांध देस्यां !

अब सुणों !
रणभेरी बाजगी है
प्रेस नोट निकळग्यो
घरां नीं सोवणों
अब जुद्ध होयसी छेकड़लो
सिर गिणीजसी
म्हां खन्नै सिर कठै
भाषण रा भंडार है
भाषण अर रासण साम्भण
भंडारां माथै
मोटा मोटा भंडारी है
म्हांनै भंडार साम्भणां है
सिर तो थांन्नै ई मांडणां है !

अब जाओ
तप्पड़ बिछाओ
माणस ल्याओ
मंच सजाओ
साम्हां बैठो
म्हारी चिंता ना करो
बगत माथै पूग जास्यां
भाषण आळा देख्या
भच्चीड़ बुला देस्यां
ईंट सूं ईंट भिड़ा देस्यां
जे पड़ै जरुरत
गिरफ्तायरयां सारु
त्यार रैया बध बध
उण घड़ी म्हांनै तो
होवणों पड़सी "भूमिगत"
चिंत्या ना करया म्हारी
आगीवाणां नै तो इयां
करणों ई पड़्या करै
जाओ रे डोफ्फो
इयां थोड़ी डरया करै !

छूटण आळी
चिंत्या ना करया
म्हे छुडा लेस्यां
थे देख्या अब म्हारा
मोटा मोटा लोगां साथै
कित्ता सम्बन्ध बणग्या
लारलां सूं भोत आगै हां
म्हे भोळा कोनीं
गज़ब रा गोळा हां !

सबद गळगळा


]><[ पै'ली अर अब ]><]

1.रिस्ता
पै'ली होंवंता
खून रा रिस्ता
पण अब
रिस्तां रो
खून होवै !

2.आदमी


पै'ली आदमी

भगवान नै ढूंढतो
पण अब
भगवान
आदमी नै ढूंढै !

3.धरम


पै'ली

धरम री जड़
सदा हरी राखता
पण अब
धरम री जड़
संकै नीं उपाड़ता !

4.भगवान


पै'ली भगवान

भाठां तांईं में रैंवता
पण अब
राम निकळग्यो
सगळां रो !

5.राजप्रमुख


पै'ली

राजप्रमुख
राज करता
पण अब
राजप्रमुख
अकाज करै !

[ म्हारै 1994 में छप्यै कविता संग़्रह "सबद गळगळा"रै पृष्ठ 78,79 अर 80 सूं]

विचार

.
[]मातृभाषा : दो विचार []

(1)
"मातृभाषाहीन जाति जाति नहीं कही जा सकती । मातृभाषा की रक्षा देश की सीमा की रक्षा से भी अधिक आवश्यक है , क्योँ कि यह पर्वत और नदियों से भी अधिक बलवती है । "
- टॉमस डेविस , प्रख्यात विद्वान
(2)
"मुझे यह कतई सहन नहीं होगा कि हिन्दुस्तान का एक भी आदमी अपनी मातृभाषा भूल जाए या उसकी हंसी उड़ाए , इस से शर्माए या उसे ऐसा लगे कि वह अपने अच्छे से अच्छे विचार अपनी मातृभाषा प्रकट नहीं कर सकता । कोई भी देश सच्चे अर्थों में तब तक स्वतंत्र नहीं हो सकता जब तक वह अपनी भाषा में नहीं बोलता ।"
-राष्ट्रपिता महात्मा गांधी

डांखळो

.
(@) होळी पर डांखळो(@)

होळी खेल'र घरां आयो गोमली रो धणी ।
सकल  देख'र लुगाई  होई     अणमणी ।
        कित्ता ई करया न्हाण
        आई ई कोनी पिछाण
थाप्यां सूं कूट कूट धोयो बात जद बणीं ।।

दूहा

[<>] सांचला दूहा [<>]

हेत दिखावै मोकळो , कर कर चोड़ी राफ ।
उण नै घाती मानजो , बात पतै री साफ ।1।
हां जी हां जी बोलगै , जको साम्भै बात ।
ऐक दिन आप देखज्यो , बो ई करसी घात ।2।
भेळै बैठ गोठ करै , सीसी खोलै रोज ।
थारै देसी फींच में, माथै मण्डसी मोज ।3।
काको कैवै कोड सूं , घणो दिखावै हेत ।
बोइज नुगरो आपरो, खोस खायसी खेत ।4।
घर में आवै रोज गो , साथ करावै काम ।
थारी हूणी आयगी , समझो म्हारा राम ।5।
भायला मिलै जोग सूं , दुसमीड़ा अणजोग ।
जरदो खावां कोड सूं , आपी आवै रोग ।6।

दूहा


[<>] बजट रा दूहा [<>]

मूंघीवाड़ो खायग्यो , जीवन्तड़ा री चाम ।
रोको थारा टैक्सड़ा , भली करैला राम ।1।
खरची ओछी बापजी , मतज बढ़ाओ दाम ।
सुण्यो बजट जद आपरो , पूठै लाग्यो डा'म ।2।
रोटी ओखी गांव में ,खट खट खोई चाम ।
भाड़ा बधग्या मोकळा , कूकर छोडां गाम ।3।
चुण चुण भेजां आप नै, आप चलाओ राज ।
ऐड़ी ठोको भोड में , आवै कथतां लाज ।4।
माया ममता छोडगै , झालो जन रो हेत ।
बाकी लखणां बापजी , धोळां पड़सी रेत ।5।

राजस्थान दिवस

 

मायड़ भासा रै बिन्यां, क्यां रो राजस्थान
(राजस्थान दिवस माथै ओ खास लेख)


राजस्थान री थापणा हुई बो दिन हो तीस मार्च-1949। राजस्थान नांव पच्छम रा इतिहासार 'कर्नन जेम्स टाड' 1829 में दियो। इण सूं पैली इण रो नाम राजपूताना हो। ओ नांव जार्ज थामस सन 1800 में दियो। राजपूतानै में 26 रियासतां ही। आं नै भेळ'र भारत में मिलावण री पैली चेस्टा 31 दिसम्बर, 1945 में पंडित जवाहरलाल नेहरू करी। बां उदयपुर में राजपूताना सभा बणाई। दूजी चेस्टा उदयपुर रा राजा भूपालसिंह अर बीकानेर नरेश सार्दुलसिंघजी करी। पैला गृहमत्री सरदार पटेल चौथी चेस्टा में इण राजपूतानै नै भारत संघ में रळायो। आज रै राजस्थान रै एकठ री बी सात चेस्टावां होई। पैली चेस्टा 18 मार्च, 1948 में अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली नै भेळण री। नांव थरप्यो- मत्सय संघ। इणरी राजधानी बणी अलवर। राजप्रमुख बण्या धौलपुर नरेश उदयभान सिंघ। प्रधानमत्री बण्यां शोभाराम कुमावत। दूजी चेस्टा 25 मार्च, 1948 में हुई। मत्सय संघ में कोटा, बूंदी, झालावाड़, बांसवाड़ा, कुशलगढ, शाहपुरा, प्रतापगढ, किशनगढ, टोंक अर डूंगरपुर नै भेळ'र राजस्थान संघ बणायो। इणरी राजधानी कोटा। कोटा रा महाराज भीमसिंह राजप्रमुख। गोकळदास असावा प्रधानमंत्री। तीजी चेस्टा18 अप्रेल, 1948 में होई। इण बार उदयपुर राजस्थान संघ में भिळ्यो। उदयपुर रा महाराजा भूपालसिंह राजप्रमुख। माणिक्य लाल वर्मा बण्या प्रधानमंत्री। चौथी चेस्टा 30 मार्च, 1949 में। इण बार बण्यो बृहद राजस्थान। इण बार रियासतां भिळी बीकानेर, जयपुर, जैसलमेर अर जोधपुर। राजप्रमुख बण्या महाराजा भूपालसिंह। उप राजप्रमुख कोटा महाराव भीमसिंह। हीरालाल शास्त्री बण्या प्रधानमंत्री। पांचवी चेस्टा 15 मई, 1949 में होई। अबकै मत्सय संघ भिळ्यो। छठी चेस्टा 26 जनवरी, 1950 में होई। सिरोही नै भेळ्यो। सातवीं अर छेकड़ली चेस्टा 1 नवम्बर, 1956 में होई। अबकै अजमेर रियासत भिळी। इणी दिन 9 बज'र 40 मिनट माथै राजस्थान अर राजस्थानी लोकराज रै गेलै लाग्या। आज रै आपणै राजस्थान नै बणावण सारू सात चेस्टावां होई। राजस्थान दिवस पण तीजी चेस्टा रै दिन 30 मार्च नै ई मनावणो तेवड़ीज्यौ। राजस्थानी भासा रै पाण बण्यौ राजस्थान। हाल पण राजस्थानी भासा राज-मानता नै तरसै। मायड़भासा रा मौबीपूत सुरगवासी साहित्यकार कन्हैयालाल सेठिया रै काळजै री पीड़ दूहे में बांचो-


खाली धड़ री कद हुवै, चैरै बिन्यां पिछाण?

मायड़ भासा रै बिन्यां, क्यां रो राजस्थान ?

पंचलड़ी

<><> पंचलड़ी <><>

मारै कोझा झपीड़ भायला ।
भूंडी उपाड़ै पीड़ भायला ।।
लोकराज धरै अंटी भीतर ।
कांईं गिणै थूं भीड़ भायला।।
भाई भतीजा बणसी राजा ।
लाम्बा भाग लड़ीड़ भायला।
थारै जाया है अमर राजवी।
बाकीस पूरी छीड़ भायला।।
लागगी हाथां राज तळाई ।
लूंट रा कंठा बीड़ भायला ।।

हाइकू

दस फेसबुकिया हाइकू
================


1.
छूटैलो कियां
बुलावै फेसबुक
अमल नसो ।

2.
करो कमेंट
घणां जचा'र आच्छा
मिलसी पाछा ।

3.
टेको लाइक
संभाळो लाइकड़ा
लेबा री देबा !

4.
फूटरी छोरी
खुलम खुली बातां
बेली मोकळा ।

5.
बताओ आच्छी
थारी भी होसी आच्छी
अट्टै रो सट्टो ।

6.
मैसेज बॉक्स
फेसबुकियो खेत
उगावै इश्क !

7.
मींत री भींत
खुली धरमसाळ
चेपो टैगड़ा ।

8.
पढणी कोनीं
कोई री कविता
धर कमेंट !

9.
ग़ज़ल ई है
आपां जो लिख दी
करो वा वा !

10.
बणग्या कवि
बतावै फेसबुक
टेको कमेंट ।
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