कागद राजस्थानी

सोमवार, 16 जुलाई 2012

कुचरणीं

.  डाई री कुचरणीं
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1.
जद ताईं
मिलै बजार में
भांत-भांत री डाई
बूढो नीं होवै
कोई मरद-लुगाई !
2.
पातळियै भरतार
लुक लुका'र
सिर में लगाई
डाई बेअंत
पण गोडां में
कोनी आयो
जाबक ई तंत !
3.
मरवण बोली
सुन्नी पड़ी है
सावण में
म्हारी सेज
थे किन्नैं फिरो
डाई सेंट लगा
तेजम तेज
म्हारै काळजै
बैठ सुधारो
खुद री इमेज !
4.
जोड़ायत बोली
कुलछणै भरतार सूं
बाळ धोळा
दिल पण काळो
इण नै डाई लगा
इकसार तो
करो बाळो !
5.
डाई लगाय बाळ
कर लिया काळा
बुड्ढै बाबो जी
आंख पण दे दियो
गेलै बगतां धोखो
और रै भरोसै
छेड़ बैठ्या
आपरी जोड़ायत नै
बण जद धोयो चोखो
बोल्या
बात है बठै ई
दाबो जी !

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