कागद राजस्थानी

शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014


लघु कथा


कुचरणीँ

-फेसबुक-
अदबदी कामणगारी
थोबड़ा पोथी
जकी मेँ बातां
निग्गर थोड़ी
पण ज्यादा थोथी !
-ब्लाग-
ईं सदी रो
स्सै सूं मोटो रोग !
-ई-मेल-
ऐक और
फीमेल
जकी
बणा राख्या है
लोगां नै रेल !
पै'लो सुख -
पै'लो सुख
निरोगी काया
इण बात माथै
ऐक जाम और भाया !

- रिस्ता -
अंगरेज देग्या
दो सबद
अंकल अर अंटी
जकां बजा दी
सगळै रिस्तां री घंटी ।
- सीटी -
सीटी सूं
लुगाई झट पट जावै
आ बात
आज समझ आवै
जद रसोई मेँ जोड़ायत
कूकर आगै थम जावै !

- ग़ज़ल -

प्रेमी रै मुंडै सूं
सुण'र ग़ज़ल
प्रेमिका होगी पज़ल
सोचण लागी
ओ मरज्याणोँ तो
आभै मेँ जासी
म्हां सारु
चांद तारा ल्यावण नै
फेर तो
कई बरस लागसी
पाछो आवण मेँ
कांईँ सार है
ओ रिस्तो निभावण मेँ 

लुगाई : दो चितराम



1-गांव में लुगाई

डांगरां रै निवड़ग्यो
नीरो-चारो-तूड़ी
रैयो नीं कोई चारो
बा चूड़्यां कानीं देख
ऐकली बड़बड़ाई
अब कठै है चलस
सोनै री चूड़ी री
आं नै बेच करां
इंतजाम तूड़ी रो
बापड़ा ऐ जीवड़ा
भूख तो नीं मरै
चूड़ी पैर्‌यां
काईं पेट भरै !

सोच विचार'र
बण झट सळटाई चूड़ी
चूड़ी रा रिपियां सूं
घर में न्हखाली तूड़ी !
*
2-सैर में लुगाई
....
भायली रै हाथ में
फोन देख ब्लैकबेरी रो
बा बळगी
ईसकै री आग में
सोनै री चूड़्यां कानीं देख
ऐकली बड़बड़ाई
अब कठै है चलस
सोनै री चूड़ी रो
बिना चूड़ी
किसो सुहाग गमै है
ब्लैकबेरी बिन्यां तो
सांपड़तै ई इज्जत गमै है !

सोच-विचार'र
बण चूड़ी बेची
करियां बिन्यां देरी
मोलाय ल्याई ब्लैकबेरी !

मानसूनड़ो

मानसूनड़ो रुळ परो, होग्यो अब सुन्नमान ।
बिरखा कूकर बरससी, कियां निपजसी धान ।1।
धोरी पाळी आसड़ी, टूटै पड़तख आज ।
बिरखा करदे बादळी, मधरी मधरी गाज ।2।
बादळ थारै कारणै , कळपै मुरधर माय ।
बरसादै जे छांटड़ी, कळी कळी खिलजाय ।3।
पाणी साम्यां बादळी, डोलै अंबर जाय ।
लाड लडावां मोकळो,बरसै क्यूं नीँ आय ।4।
आभो छोडो बादळी, बैठो मुरधर आय ।
नित रा लेवां वारना, लेवां गळै लगाय ।5।
बिरखा बरसी बापजी, धरती धारयो धीर ।
जळ थळ होया ऐकसा, धरती पसरयो नीर ।।

*अजादी*

गोरा भाज्या छोडगै ,होयो देस अजाद । 
हाल गुलामी सांकड़ै,चौसठ बरसां बाद ।।
भारत माता आपणीं , खड़ी उडीकै आज ।
भिस्टाचारड़ो मेटसी , पूत बचासी लाज ।।
नीत सुधारो आपरी , पाछै भूंडो लोग ।
खुदरै सुधरयां मिटैलो, भिस्टाचार रो रोग ।।
अजादी री सोगन खा , तजो खुद भिस्टाचार ।
खुद मरस्यो जे भायला, हो सी जय जयकार ।।
आज अजादी आपणीँ, सांसां सूं अणमोल ।
पूत धरम अपणाय लै,भारत माता बोल ।।

डांखळो


फोज में भरती होग्यो सेठां आळो छोरो ।
गोळी ना लागै इण सारु करवायो डोरो ।
            छिड़गी छेकड़ जंग
              लाई होयो तंग
बोल्यो पेँट भरै, कठै है ओट खातर धोरो ।।

राम राखसी टेक



साल बदळसी काल नै , होसी उच्छब अपार ।
घर-घर गोठां चालसी , आगत रै सतकार ।।
गोठ करैला भायला , दारू री मनवार ।
नाचा कूदा मोकळा , धूमस अपरमपार ।।
भल होवैला जीमणां , भूल गरीबी सार ।
मूंघीवाड़ो मारसी , सागी बा ई मार ।।
साल बदळियो मोकळा , बदळै न मिनख एक ।
सागी होसी राज में , राम राखसी टेक ।।
एक कलैंडर बदळसी , बोदो देसी फाड़ ।
घर-घर सागी चालसी , तंगी आळी राड़ ।।

लोकराज


लोकराज इण देसड़ै, नेता लेग्या खोस ।
आपां टेक्या बोटड़ा , किण नै देवां दोस ।1।
नेता ले गै बोटड़ा , बैठ्या भोगै राज ।
थारै पांती कूकणो ,सुणलै बेली आज ।2।
रोटी गाभा झूंपड़ा , मत ना मांगो आप ।
ऐ चीजां तो भायला, नेता खावै धाप ।3।
नेता रै घर जामसी , नेता पाछो काल ।
थारै थूं ई जामसी, सुणलै मेरा लाल । 4 ।
नोट कमासी बापड़ा, बोट नोट रो मेळ ।
मरजी आं री आपरी,कुणसो भेजै जेळ । 5 ।

बिरखा


बिरखा बरसी सांतरी, मुरधर जागी आस ।
कोठा भरसी धान रा ,डांगर चरसी घास ।1।
हाळी हळड़ा सांभिया, साथै साम्भ्या बीज ।
खेतां ढाणी घालसी , स्यावड़ गई पसीज ।2।
ऊंचै धोरै बाजरी, ढळवोँ बीजूं ग्वार ।
बिच्च बिच्च तूंपूं टींढसी, मतीरा मिश्रीदार ।3।
ऊंचै धोरै टापरी, साथै रैसी नार ।
दिनड़ै करां हळोतियो, रातां बातां त्यार ।4।
काचर काकड़ कीमती, मतीरा मजेदार ।
मोठ मोवणा म्होबला, धान धमाकैदार । 5।
खेजड़ हेटै पोढस्यां,पेड्डी टांगां पाग ।
सुपणां मीठा आवसी,आथण आसी जाग ।6।
टीकड़ सिकसी राख मेँ, हांडी पकसी साग ।
ढाणी ठाठां लागसी, अब जागैला भाग ।7।
कड़बी गासी गीतड़ा, ग्वार सारसी राग ।
मुरधर मजमा लागसी, जद जागैला भाग ।8।
रात्यूं काढां गादड़ा,दिनड़ै डांगर ढोर।
मतीरा खावां दिनड़ै ,रात नै सिट्टा मौर ।9।
तिलड़ा तुरता तिड़कसी, बाजर देसी साथ ।
मोठ मरजी मानसी, जद लागांला पांथ ।10।

*डांखळै पर डांखळो*


हाथ सूं छूट नाळी में पड़ग्यो सो आळो लोट ।
कादै मेँ सोधण कूदग्या सेठजी बांध लंगोट ।
           कादो भरीजग्यो मुंडै में
            भोत खाटी होई भुंडै मेँ
सेठाणी तो छोड छाड बसगी जाय'र मलोट । 
*

गुड़गांवै सूं सेठ खरीद ल्यायो बकरी ।
बा घर सूं भाजी अर गोधै सूं जा टकरी ।
           गोधै दिखायो रंग
            सेठ होगियो तंग
चक धोती बो भाजग्यो फतैपुर सीकरी ।।

*ऊंदी कविता*

हाथी चकगै कीड़ी चाली।
धरती चकगै कूऐ घाली।।
मांचो माणस माथै सोवै ।
आटो फैँकै छाणस पोवै ।।
मोटर माथै सड़कां चालै।
नै'रां माथै धरती चालै ।।
सुपनां मेँ अब नींदां आवै।
मा नै गोदी पूत रमावै ।।
नळको पाणीं नीचै न्हावै ।
फळ धरती रै नीचै आवै ।।
रोटी खा गी माणस सारा ।
पाणीँ पीग्या कूआ सारा ।
कुलफी खा गी घोचो सारी ।
बातां मिलगै सोचो सारी ।।

*म्हे कुटीजता*

म्हे जद छोटा हा
बात बात माथै 
रूस जांवता
मानता तो मानता
नीँस कुटीज जांवता
कई बार
कुटीज जांवता तो भी
रूस जांवता
मानता ई नीँ
लाख मनायां ई !

ठाकुरजी रै भोग ताईं
आई मिठाई
चोर'र खांवता तो कुटीजता
मांगता तो भी कुटीजता
पत्थर रै भगवान रै
चढ्योड़ी मिठाई
भगवान तो नीँ
हरमेस म्हे ई खांवता
लुक बांट'र
ठाह लाग्यां
नीँ लाग्यां भी
म्हे ई कुटीजता !
पत्थर री देवळी तो
सदां ई इकसार
हांसती रैँ'वती
मा खानीँ अर म्हां खानीँ !

*बिरखा*

बरसो मत नां बादळां ,बरस्यां दुख है भोत ।
साजन सोवै खेत में , म्हानै आवै मौत ।।
टूटी फूटी झूंपड़ी , चौवै च्यारुं मेर ।
कितसी ढाळूं ढोलियो, बिरखा काढै बैर ।।
टप टप टोपा तन पड़ै, पिंडै लागै लाय ।
साजन भंवै आंतरा, बादळ दै सिळगाय ।।
गांव बिचाळै टापरी, आंगण साम्हीं पोळ ।
संग नहावै सायबो , बरस्यां बिगड़ै डोळ ।।
छम छम बरस्या बादळा, टप टप चौई छात ।
साजन ढाबै छात नै, आंख्या थमगी रात ।।

* आव परी * [ लोरी ]

 आव परी तू आव परी ।
मीठी नीँदां ल्याव परी ।।
लाली म्हारी जागती ।
राली तकिया मांगती ।
थारै हाथां आव धरी ।
आव परी तूं आव परी ।।
लाली नींदां सोयसी ।
मीठा झोला लेयसी ।
दुख नींदां मेँ आय हरी ।
आव परी तूं आव परी ।।
सुख री नींदां ल्याव परी ।।
मीठा सुपना ल्याव परी ।।

*बात री बात*

बात री कांईं बात
बात री कांईं बिसात
बात बात में 
बात री बात चलै
बात बात में बात टळै
बाकी रैवै बात
बाकी बात सारु
फेर बात टुरै
बात फुरै
बात सारु बातेरी झुरै !

बात हो जावै
बात रै जावै
बात बण जावै
बात ठण जावै
बात नै नट जावै
तो कोई बात सूं हट जावै
कोई बात डट जावै ।

बात कैवणी पड़ै
बात देवणी पड़ै
चुगलखोरां नै
बात लेवणी पड़ै
सीधै साधै नै
बात सै'वणीं पड़ै
बात बिगड़ जावै
तो कदै ई बात बण जावै
लोग बातां नै अरथावै !

बात बोलणीं पड़ै तोल
बात रा होवै मोल
लाख टकै री बात
धेलै री बात
आगली बात
लारली बात
झूठी बात
सांची बात
बात री आंट होवै
पछै बात री कांईं आंट !

बात तो बात
छोटै री बात
बडां री बात
बैरयां री बात
सखा सहेली री बात
थारी बात
म्हारी बात
खरी बात
खोटी बात
लुकत री बात
बात चोड़ै आवै
असली बात मोड़ै आवै !

बात राखणी पड़ै
बात दाबणीं पड़ै
बात ढाबणीं पड़ै
बात आज री
बात राज री
बात राजा री
बात परजा री
बात अहलकारां री
बात हरकारां री
बात साहूकारां री
बात दान री
बात करज री
बात गांव री
बात गळी गुवाड़ री
बात सैर री
बात फैसन री
बात रासन री
बात भूखां री
धायां री बात
भायां री बात
जायां री बात
बात भीतर री
बात बाअंडै री
सीधी बात
साफ बात
बात बात में बात टूटै
पाछी बात सारु बात जुटै !

बात बिगड़ै


बात घुटै
बात रा दाम
दाम री बात
काम री बात
नाम री बात
इन्याम री बात
धाकड़ बात
मिनखां री बात
लुगायां री बात
टाबरां री बात
झोटां री बात
बोटां री बात
काळजै री बात
मन री बात
दिल री बात
होठां री बात
स्याणां री बात
गूंगां री बात
बात रा रूप अनेक
बात रा सरूप अनेक

*जावां कठै*

मत ना पूछो हाल
हाल माड़ा है
जावां कठै
लोरयां रा भाड़ा है
तेल रा खेल
भूंडा अचपळा
रिपड़ा पल्लै कोनीं
तेल घलै कोनीं
फटफटियो चलै कोनीं
राज हाथै बातै नीं
मंडै चंवरी कोनीं
बचै भंवरी कोनीं
करां खटको
लट्टू जगै कोनीं
निरा बिल है
बिलां लारै
नागा नेता नाग है
काळजै निरी आग है
म्हारै कांईं लाग है
पण डरै दिल है
खाली पेटड़ा 


पण भरै बिल है
नळ रोवै टोपा टोपा
नेता होग्या गोपी गोपा !

लिखां कविता सुणै कोनीं
सुणै तो गुणै कोनीं
गाभा तो चोखा धोळा है
कानां सूं पण बेजां बोळा है
आं री आंख्या पाटी है
जूण जनता री हळदीघाटी है
धिकावै धाको
लगावै नाको
चुप चाप पड़ी है
बापड़ी रोवै कोनीं
मांगै कोनीं अर पोवै कोनीं !

गांधी बाबो कीलग्यो
भूखा हो तो मारो मत
भूखा मर बिगाड़ो गत
बात तो आ जचै कोनीं
नेता रो कीं बिगड़ै कोनीं
म्हारो कीं बचै कोनीं !

मूंघीवाड़ै मेँ प्यार रा दो चितराम

-एक-
छोरा बोल्या
इण मूंघीवाड़ै में
कोनीं पड़ै पार
मत करो प्यार 
आगै बध्या हो तो
लारै हटणों पड़सी
प्यार खातर छेकड़
नटणों पड़सी !

-दोय-
छोरयां बोली
इण मूंघीवाड़ै में
कोनीं पड़ै पार
अब करो प्यार
अब ताईं रो मून
अब तोड़णों पड़सी
इश्क रो गाडो
अब जोड़नो पड़सी !

. * झपीड़ *

भोळा थारै देवरै , पूजण ढूकी भीड़ ।
किण बातां री रीस में , ऐड़ो दियो झपीड़ ।।
पापी बैठ्या देसड़ै , मरग्या सै निसपाप ।
पापी मरज्यै चूकती , आंख्यां खोलो आप ।।
डूंगर बैठ्या आप तो , ठोको कितरा भोग ।
भूखा मरग्या जातरू , थांरै क्यूं नीं सोग ।।
माणस डूब्या मोकळा, खुर लाधै ना खोज ।
नेता ढूकै झाजड़ां , क्यूं खिंचावै पोज ।।
कितरी तो बैनां गमीं , कितरा गमग्या बीर ।
कितरा घर ऊजाड़िया , बदळी क्यूं तकदीर ।।

*छोरी -सात चितराम*

1.
झांझरकै
बेगी नीं जागी
बापू जी कर दी
खाट खडी 
झाल चोटी
कर दी खडी !
2.
पैली बार बणाई
रोटी नीं बणी
मा दाईं गोळ
मा झिड़की
बळ्यो बाळणजोगो
थांरो डोळ
परनै बळ रसोई सूं
कमकसू डफोळ !
3.
गळी में खेलतां
लागगी ताळ
बीरै खींच्या बाळ
काढी गाळ
घर सूं निकळी तो
बाढ देस्यूं खुरडो !
4.
जिद्द करली
बैन-भाई
सैर में जाय
अंगरेजी री भणाई
भेळा पढण री
अर
पीळती बस चढण री
भाई ई पढ्यो
म्हारै बा ई
गांव आळी सागी
सरकारी पोसाळ !
5.
डागळै माथै
उडता किन्ना
लड़ता पेच
कटता किन्ना
देख हांसी
पगां कूद-कूद
बजाई ताळी
बापू दी दाकल
मा लढकाई
बीरो हाल नीं बोलै
इण बात पर !
6.
सासरै पूगी तो
बै ई बातां
बेगा उठो
मोडा सोवो
रोटी गोळ बणाओ
डागळै मत जाओ
गळी में बात नीं
भींत ऊपरियां कर
बाता-चींता मत करो
सासरै री बात
पीरै मत करो
पीरै रा
पीत्तर-देवता छोडो
सासरै रा धोको
जुबान मत चलाओ
आपमत्ती मत करो
कैवणों मानो
खबरदार है
जे मुंडो उघाड़्‌यो
पीरै मेलां तो जाओ
बुलाओ तो आओ !

पीरै में बेटी ही


सासरै में बीनणीं
म्हैं तो
ही ई कोनीं कठै ई
ना पीरै में
ना सासरै में !
7.
पीरै में
मा बापू
बैन भाई म्हारा
लुळै बां आगै
सासरै में
मा बापू
बैन भाई बां रा
म्हैं लुळूं आं आगै
म्हैं लुळी बां आगै
म्हनै फरक नीं लखावै
मा बापू अर सासू सुसरै में
देवर जेठ अर भाई में
बैन अर नणदळ बाई में
म्हारै सारू
सगळा ऐकसा !

थम रे रिपिया !

रोळो मच रैयो है
रिपियो गिरग्यो
गिर्‌यो पण कठै है
ओ बताओ तो सरी
ढूंढ'र तो ल्यावां 
जे स्विस बैंक में
न्हाख आया
का फेर
अमेरिका में जाय
छोड आया तो तो
लाधणों दोरो है !
*
अरथसास्तरी बोलै
रिपियो सस्तो होग्यो
जे आ सांची है तो
रिपियो कमावणों
इत्तो दोरो क्यूं है
क्यूं नीं आवै हाथ
कोई गरीब रै ?
*
देस में जद
नेता-जनता
सरकार अर साहूकार
कोई भी गिर सकै
तो रिपियो लाई
लारै कियां रैवै !
*
थम रे रिपिया
ईंयां नेतावां दाईं
मत ना गुड़क
थांरो तो
माजणों है यार !

शिक्षक दिवस

एक जणों शिक्षक दिवस आळै दिन न्हा-धो'र आपरै काकै रै पगां लागतो । किणीं पूछ्यो, " बावळा , थूं इयां कियां करै ? आज रै दिन तो गुरुंआं रै पगां लागणों चाईजै , काकै रै पगां क्यूं लागै ?"
बो बोल्यो म्हानै तो गुरु जी सिखायो हो कै "गुरु गोविन्द दोऊं खड़े , काके लागूं पांय । अर अरथ भी ओ ई बतायो हो कै काकै रै पगां लागणों चाईजै !" 

*
 

*बै दिन*

दिन तो बै हा
जद भेळा बैठ जीमता 
एक थाळी भाई-भाई
मा जीमांवती म्हे जीमता
धापता ई कोनीं
आखती होय मा कैंवती
पेट है का कूओ
धापै ई कोनीं मरज्याणां
अर फेर रात नै
दूख जांवतो जे पेट तो
मा थुथकारा घालती
मिर्च उवारती
खुद नै गाळां काढती-
म्हारी निजर लागगी
म्हारी ई लागी है टोक
पछै कोई रोक नीं सकतो
मा री आंख्या रा बा'ळा !

बीस मांचा ढळता
सोंवता जद बाखळ में
आधी रात ताईं
कहाण्यां सुणांवता
एक रै बाद एक
नित नवी-नवी
घर रा बडेरा
म्हे सोंवता
हंकारा भरता-भरता
दिन तो बै ई हा !

अब सोवां म्हे
आप-आपरै कमरां में
टाबर कठै ई
म्हे कठै ई
हरेक कमरै में
भूंसै टीवी
सगळा देखै लुकत में
आप-आपरै
मनभांवता प्रोग्राम
जिण रै आगै
दरकार ई नीं
कोई हंकारै री !

* पंचलड़ी *

आया जिका पूछण हाल भाईड़ा ।
बै ई तो सूंतग्या खाल भाईड़ा ।।


भेळा बैठ जीम्या आथण दिनूगै । 
धूड़ थाळ में गया घाल भाईड़ा ।।
पेटां पड़्यो काढलै रोटी-पाणीं ।
भूंडी घणीं चालै चाल भाईड़ा ।।
करां खोरसो टसकां टंक टाळता ।
बै अरोगै फुरवां माल भाईड़ा ।।
जे चावै डोळ बदळणों खुद रो थूं ।
जाय आं रा झींटा झाल भाईड़ा ।।

गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

*बाबा बदनाम*


राजा भरतो हाजरी, बाबां आगै जाय ।
अब बाबा रोज मंडै, राजा आगै जाय ।1।
राजा करतो चाकरी,बाबां चरणां बैठ ।
अब तो चाटै पगथळी, बाबां खोई पैठ ।2।
राजा सोंतो ओजकै , बाबा लेंता चैन ।
राजा सोवै चैन सूं, बाबा जागै रैन ।3।
बाबा तपता मोकळा , धन सूं जाता दूर ।
बाबां रोप्या बिणजड़ा, लाज्या भगवां पूर ।4।
बिरम ग्यान नै ध्यांवता ,बाबा हा निसकाम ।
रगां बिराजै कामड़ो, बाबा है बदनाम ।5।

*सतलड़ी*


-रूंखड़ा-


जड़ां छोड्या पिराण रूंखड़ा।
ऊभ्यो किणरै ताण रूंखड़ा।।
तूं तिरसायो कळपी धरती।
आभै में घमसाण रूंखड़ा ।।
छीँयां सटै आज पंछीड़ा ।
भूल्या मीठो गाण रूंखड़ा ।।
थारा पान खोय बायरियो ।
रुळग्यो राणोराण रूंखड़ा ।।
बरसां थारै बांध राखड़ी ।
बळगी बेलां भाण रूंखड़ा ।।
थारी काया मुरधर माया ।
आज रुळै है आण रूंखड़ा ।।
काढ़ पानका दे हरयाळो ।
जीयां थारै पाण रूंखड़ा।।

*सावण जावै हाथ सूं*

सावण सुंरगो आवियो, आया नीँ भरतार ।
काया म्हारी दाझगै,कांईं चावै करतार ।।
आभै चमकी बीजळी, धरती बधगी आस ।
कळपै थारी कामणीँ, साजन आओ पास ।।
सावण बैरी सायबा, नित रो बरसै आय ।
घरां पधारो सायबा, जोबन बैरी खाय ।।
हिंडो मांडूं हेत सूं , गाऊं गीत पच्चास ।
सायब होवै साथ मेँ, हिंडो चढै अकास ।।
फोन लगाऊं सायबां, आवै कोनीँ टोन ।
सावण जावै हाथ सूं , ओन करो नीँ फोन ।।

डांखळो


छोतियो बोल्यो डर कोनीं लागै आं भूत स्यूं ।
आधी रात नै जाय'र मुसाणां मेँ मूत स्यूं ।
              भूतिया भेळा होया
             जमराज आगै रोया
मुसाणां नै बचाओ महाराज ऐड़ै ऊत सूं ।।

**पांच कुचरणीं**

1.
-वफा-
वफा करी
कई दफा
नीं लाध्या नफ़ा
नीं पड़ी पार
छेकड़ सोची
कर दफा !
2.
-इश्क-
कदै ई
नीं होवैली
कवर
रिस्क
चाल मनड़ा
आगै खिस्क !
3.
-प्यार-
कर प्यार
फेर
आंख्यां झार
नीं पड़ै पार
थूं ई कर यार !
4.
-नातो-
ईसकै रो
खुल्लो खातो
खुद ई बरतो
खुद ई कातो !
5.
-वादा-
इश्क मेँ
करतां करतां
वादां पर वादा
बणग्या
दादी अर दादा
अब
कांईं बतावां जादा !

*पांच कुचरणीं*

1.प्यार
बा बोली
थे म्हनै प्यार करो
म्हैं बोल्यो
जाओ पै'ली
थोबड़ो तो त्यार करो !

2. इस्क

बा बोली
म्हनै है
थां सूं इस्क
म्हैं बोल्यो
खुली आंख
कोनीं उठावां रिस्क !

3.लव लैटर

बा बोली
थे म्हनै
लिखो लव लैटर
म्हैं बोल्यो
कागद क्यां सूं
करां काळा
जद फोन माथै'ई
निवड़ग्यो सगळो मैटर !

4.प्रीत

बा बोली
म्हनै थां सूं
कित्ती प्रीत है
थे जाणों कोनीं
म्हैं बोल्यो
म्हैं जाणूं
पण म्हैं
थां जित्तो
स्याणों कोनीं
तन्नै तो म्हारो
सो कीं मिलसी
पण म्हारै हाथ
कीं आणो कोनीं !
5.फूटरी

बा बोली
देखो जी
म्हैं कित्ती फूटरी हूं
म्हैं बोल्यो
म्हैं कदर करुं
इण झूट री !

*क्यूं कर्‌यो तांडव*

म्हैँ मांग्यो
तिरस भर पाणीं
थूं मुंदा दियो आभो
म्हैं डूब्यो 
थांरै नेह रै मेह में
थूं भी तो रीत्यो है
अब आव नीचै
देख धरा माथै
कांईं-कांईं बीत्यो है ?
*
म्हैं पूज्या भाखर
घड़-घड़ थांरा उणियारा
चढ-चढ डूंगरां
लगाई फेर्‌यां
धोकी थांरी देवळ्यां
फेर भी थूं
क्यूं बळ्यो रीसां
क्यूं कर्‌यो तांडव
क्यूं लिया इत्ता भख
नसै मेँ हो कांईं
देवां रा देव महादेव
थूं भोळो तो कोनीं
जरूर रोळो है कोई !

*कुचरणीं*

ब्यांव रै मौकै
छोरी रै घर माथै
रंग बिरंगी लड़यां लगा
मोटा मोटा लोटिया चसा
बेजां च्यानणों कर्‌यो
छोरै छोरी नै कैयो
देख थांरै घर माथै
म्हांरै सनमान में
थांरै घरआळां डरतां
कित्तो च्यानणों कर्‌यो है
तो छोरी बोली-
म्हांरै घरआळां तो
एक ई दिन
च्यानणों कर्‌यो है
थोडा थम जाओ
म्हैं थांरैं घरां पूग'र
बिन्यां लोटिया चसायां
इस्सो च्यानणों कर देस्यूं
कै थे उमर भर याद करस्यो !

. *घी घालां तो गाळ*

साग बणावां बापजी, प्याज टमाटर टाळ ।
छमकां जे म्हे तेल में , म्हानै लागै गाळ ।।
पाणीं ठोकां धपटवों , जे म्हे रांधा दाळ ।
चूरां कोरी रोटियां , घी घालां तो गाळ ।।
फळ खावां न दूध पियां , ऐ चीजां जंजाळ ।
मेवा मिसरी सोचतां , म्हांनै आवै झाळ ।।
फोटू देखां साग री , मुंडै चालै ल्याळ ।
इण भै सूं म्हे डरपता , फोटू देवां बाळ ।।
नोट कमायो बापजी , डील समूळो गाळ ।
राज बतावै बापजी , रिपियो गुड़कै ढाळ ।।

*म्हे भोत राजी होंवता*

बाखळ में सोंवता
आंख्यां में भरता 
समूळो आभो
आभै में पळकतो
चंदो मामो अटल
अणगिणत तारा
तारां में बसता
बिछड्रया सारा
मा बतांवती
उण तारै में देख
थांरो नानो जी है
उण में है नानी
थांरा दादा-दादी भी
थांनै देखै
देख्या धूमस ना कर्‌या
बिराजी होवैला सारा
अर फेर म्हे सगळा
तारां नै गोखता
आदरभाव सूं
जद टूटतो कोई तारो
मा कैंवती
थां में सूं कोई
कूड़ बोल्यो है
दादो जी रिसाण होग्या
बै आवै है नीचै
थांरी स्यामत है अब
अर म्हे डर'र
मुंडो ढक सो जांवता !

दिनूगै पूछता
रात दादो जी कांई कैयो
मा कैंवती
दादो जी कैंवै हा
टाबर तो स्याणा है
बोला बाला सूत्या है
मा री बात सुण
म्हे भोत राजी होंवता !

*सतलड़ी*

जाग सकै तो जाग भायला ।
नीँ-स लगा दे आग भायला ।
मनड़ै री कथ बेगो बेगो ।
क्यां भी काढै राग भायला ।
उछाळ आज मत माथै राख।
नीचै पड़गी पाग भायला ।
थारी पांती खोसण ढूक्या । 
मुंडै अणवा झाग भायला।
गोदा घुसग्या आंख्या सांमीं।
क्यूं लुटवावै बाग भायला ।
भाषा थारी भूंडै नुगरा ।
कर दे बां रा दाग भायला ।
लेय लाम्पो लगावण चालां ।
बूजा है अणथाग भायला।

मुंडो सकां न खोल

आक चाबतां बापजी, होया चौसठ साल ।
आम्बा कदसी चूसस्यां, ऊभो ऐक सुआल ।1।
मुंडा म्हारा सील है, बोलां कीकर राज ।
मन री मनड़ै दाबगै , रोवां गूंगा आज ।2।
भाषा थारी कैद में, करो कनीँ आजाद ।
खोलां मन री गांठड़ी, देवां घण लखदाद ।3।
सगळा प्रदेस आपरी , भाषा राखी टाळ ।
म्हारी भाषा मांगतां, क्यूं काढो थे गाळ ।4।
डांगर कांटा कागला , बोलै खुद रा बोल ।
भूंडा म्हारा भाग है , मुंडो सकां न खोल ।5।

डांखळो


गुड़गांवै  गयो  ग्यानी  गंगोतर गोरड़ो।
घरां कै'र गयो ढूंढ्या ना लाडी छोरड़ो ।
     ठोड़ ठिकाणोँ ठायो कोनीँ
       बुलवायो तो आयो कोनीँ
थम्यो जद पड़्यो पुलिस आळो कोरड़ो ।।

ढब बादळ

जा रै डोफा बादळ
कदै ई इयां ई
बरस्या करै
बरसा बरसा पाणीं
थूं तो ले लियो
मिनख रो पाणीं
फिरै बापड़ो
अब गाणीँ माणीं !

टपकती टपकती
छेकड़ टपक ई गई
भींता बिचाळै छात
भींतां लुळी
उठावण नै
पण पसरगी
आंगणैं मेँ
सूंएं बिचाळै छात !

ढब !
अब ढब बादळ
भीँत चिणावां
उठावां छात
बणावां बात
थारै तांईं
आगै सारु !

ओळ सबदां री

सबद भरसी साख
थूं म्हैं नीं
खूटती जगती नै
पग पग अरथावण !

आज होसी काल
काल होसी आज
आज आपां
काल कुण
अणबोल्या सबद
भंवसी जगती में
बिन्यां बाकां
उंचायां निसार रो सार
खूटती-जगती रो !

आज सुरजी पळपळावै
मारै चौगड़दै पळका
बगै आज बायरो
च्यारूं कूंट
भीतर बाअंडै
काल रो पण कांईं ठाह
भरै कै नीं भरै
साख काल री !

उण बगत होवैला
बिम्ब पड़बिम्ब अदीठ
हेला झाला
मनवार हथाई
री साख अणसाख !

स्यात प्रीत ई बंचसी
जकी अंवेरसी
सबदां नै बीजमान
जिण रा बी'रा
काढसी पानका
पाछा पसारण
सबदां री जाजम !

आव साम्भां
प्रीत रा बीज
ओळ सबदां री !

आफत

आफत है साम्हीं
ओ जाण'र
लुक'र सोयां
हार मान'र रोयां
पार नीं पड़ै
पार तो भाई
आफत रै साम्हीं
आयां ई पड़सी ।

भाजणियां कुटीजै
का पड़ै आखड़'र
थे क्यूं भाजो
दकाळो अर लारै पड़ो
पगबारी आफत रै
मांडो लड़त
देख्या, एक दिन
बै ई जीतसी
जका आफत सूं लड़सी !

* घर में पूजो देवता *

घट में बैठ्या देवता , बारै ढूंढो आप ।
बारै घूमै मौतड़ी , घर में करल्यो जाप ।।
खोटी करगै कामड़ा , तीरथ जाओ आप ।
खरची खूटै गांठ री , दुख पाओ अणमाप ।।
देवी मिली न देवता , डूंगर चढग्या आप ।
पाछा आया गुड़कता, परकत रै परताप ।।
घर नै लूंटै चोरड़ा , बारै घूमो आप ।
घर में पूजो देवता , मिटसी सै संताप ।।
शंख बजाओ मोकळा , ढोलां देवो थाप ।
छोड मजूरी भायला , खास्यो कांईं आप ।।
मायड़ बाबो टाबरी , देवां जेड़ी छाप ।
आं री भरल्यो हाजरी, मिटसी सारा पाप ।।
सांचो तीरथ मावड़ी, मोटो मिन्दर बाप ।
आं नै घर में पूजल्यो, कटसी सारा पाप ।।

बोटां आळी गाय

थूक बिलोवै नेतिया , काढै गाळां लाख ।
मरगी जनता बापड़ी , उण री कांईं साख ।।
जनता तो है बापड़ी , बोटां आळी गाय ।
नेता अरणां सांडिया , चोखी आई दाय ।।
टैक्स चुकावै मोकळा , आवै कीं नीं हाथ ।
जनता रोवै बापड़ी , साय करो रुघनाथ ।।
जनता धोकै देवरा , पांती आवै मौत ।
नेता भूंसै मोकळा ,नोट कमावै भोत ।।
कुरसी खातर नेतिया, बैड़ा बोलै रोज ।
एकर कुरसी रूधलै , पांच साल री मौज ।।
हार्‌योड़ा कूकै घणां , जीत्यां आवै स्यांत ।
जनता जाओ दरड़ में, नेता राजा भांत ।।

. *तीन कुचरणीं*

1.
आया कोनीं
चुणावां में बोट
नेताजी रै
चढगी घोट
बोल्या-
अब किंयां सिकसी
राख में रोट ?
1.
नेताजी रो जद
जनता में घटग्यो रेट
दियो ग्यापन
बैठग्या धरणैं
बोल्या-
उठाओ अठै सूं
ओ कोटगेट !
3.
नेताजी रो रथ
पारटी में होग्यो
जद व्यरथ
नेताजी चाल्या चाळा
सुणलै रे ऊपरआळा
बुढापै री लकडी
कुरसी झला तकडी !
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