कागद राजस्थानी

शुक्रवार, 15 जून 2012

डांखळो

डांखळो
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सगळी बातां रो जाणकार मानतो खुद नै कवि दादो ।
बातां रो मतलब बतावण रो करया करतो खुलो वादो ।
                         पड़ती   जद पार नीं
                       मान्या करतो हार नीं
रीसां बळतो कर दिया करतो भच्च देणीं बात रो कादो ।।

1 टिप्पणी:

  1. जोर गो थो कवि दादो और जोरगी है थारी कविता गुरू जी!

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