कागद राजस्थानी

शनिवार, 3 सितंबर 2011

राम जी री डोकरी


 ** बुड्ढी माई **




 

समूळो राजस्थान ऐक ई संस्कृति अर परापर रो धणीँ है । भाषा ई समूळै राजस्थान री ऐक ई है अर बा है आपणीँ राजस्थानीँ ! इण भाषा मेँ 73 बोल्यां है पण चीज बस्त अर जीव जन्त नांव ऐक ई है । न्यारी न्यारी बोल्यां मेँ उच्चारण भेद है । मुहावरा, कहावत, लोककथा, लोकगीत, लोकभजन , लोकदेवता , तीज त्यूंआर तो ऐक सा ई है आपणै राजस्थान मेँ । 73 बोल्यां रै ताण आपणै खन्नै ऐक ई चीज रा 500-500 पर्यायवाची है । इत्ता पर्यायवाची दुनियां री किणीँ भाषा मेँ नीँ लाधै । आ आपणीँ भाषा राजस्थानी री त्यागत है । 
ऐक छोटो सो बरसाती कीडो ! नांव बूढी माई !    ओ कीडो़ बिरखा रै दिनां चोमासै में निकळै । लाल -लाल ! मखमल रो फ़ोवो सो ! देख्यां जीव हरखै ! 
आ बरसाळै मेँ निकळै । आसोज सूं लेय'र भादवै तांईं यानी समूळै चौमासै । बिरखा होई नीँ क आ आई नीँ !इण रा अलेखूं नांव ! आपां अठै इण रा नाआं रा जिकर करां देखाण-



ल्यो अब इण जीव रा नांव बताऊं-
* राजस्थानी मेँ -
1.बुड्ढ़ी माई
2.सावण री डोकरी
3.बुड्ढ़ी नानी
4.तीज
5.मखमली बाई
6.ममोल
8. ममोलियो
9.ममोलण
7.इंद्राणीं

* हिन्दी मेँ-
1.वीरबहूटी
2.इंद्रवधु

*अंग्रेजी मेँ-
रेडवेलवेटमाइट
* जीव विज्ञान मेँ-
संधिपाद विभाग री लूना श्रेणीँ मेँ वरुथि वर्ग मेँ द्रोम्बी डायोडी परिवार के डायनाथोम्बियम वंश रो ऐक जीव । कीड़ो ।

* खास बात-
1.इण रै पांसळ्यां नीँ होवै
2. चौमासै मेँ इंडा देवै
3.बचिया 24 घंटा मेँ इंडा सूं बाअंडै आ जावै
4.इण रै आठ पग होवै
5.ओ कीड़ो यानी बुड्ढ़ी माई भोत संकाळु जीव होवै

6. बुड्ढ़ी माई खास कर असाढ मेँ दिखै पण समूळै चौमासै री धिराणीँ बजै 


बात बात मेँ कित्ती जोरगी बात होयगी । बुड्ढ़ी माई रा कित्ता नांव साम्हीं आग्या । आप ई लिख्या तो कई भायां फोन कर कर'र बताया । आओ बुड्ढ़ी माई रै नांवां री ऐक और लिस्ट बांचां-
1.लाल गाय
2.सावण री डोकरी
3.लाल डोकरी
4.राम जी री डोकरी
5.इन्द्र-वधु
6.इंद्रगोप
7.वीरधूटी
8.मामोलो
9.ममोलो
10.मामलियो
11.ममूलियो
12.ममोलियो
13. वीर-बहूटी 

 "वीरबहूटी" रो मायनो
वीर=योद्धा
बहूटी=वधु
[] बुड्ढी माई माथै राम स्वरूप किसान रो दूहो-
बूढी माई आ नहीं, झूठो बोलै जग्ग।
इन्दराणी रै नाथ रो, पड़ग्यो होसी नग्ग।
[] म्हारा ई दूहा-
अंबर इंदर गाजियो, धरती करै बणाव ।
मखमल गाभा पै'रगै, डोकरी पूरै चाव ।।
बूढी माई आयगी, देख भरंता ताल ।
इंदराणी री नाथ सूं , पड़गी जाणै लाल ।।
अंबर लालां मोकळी,बरसै सागै मेह ।
म्हारै खेतां ड़ोकरी , राखै कतरो नेह ।।

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