कागद राजस्थानी

शनिवार, 3 सितंबर 2011

मायड़भाषा रा दूहा

मायड़भाषा रा दूहा

आक चाबतां बापजी, होया चौसठ साल ।
आम्बा कदसी चूसस्यां, ऊभो ऐक सुआल ।1।
मुंडा म्हारा सील है, बोलां कीकर राज ।
.मन री मनड़ै दाबगै , रोवां गूंगा आज ।2।
भाषा थारी कैद में, करो कनीँ आजाद ।
खोलां मन री गांठड़ी, देवां घण लखदाद ।3।
सगळा प्रदेस आपरी , भाषा राखी टाळ ।
म्हारी भाषा मांगतां, क्यूं काढो थे गाळ ।4।
डांगर कांटा कागला , बोलै खुद रा बोल ।
भूंडा म्हारा भाग है , मुंडो सकां न खोल ।5।
 भागी चीड़ी कागला, बोलै मायड़ भास ।
निरभागी म्हे मिनखड़ा, बोलण छूटी आस ।6।
विधान सभाज आपरी, चुणां घाल खुद बोट ।
बोलै भाषा आपरी,बजै बठै बै ठोठ ।7।
हिन्दी होवो हिन्दवाणी, बणो हिंद री ताज ।
राजस्थानी मत राखो , भाषा सूं मो'ताज ।8।
भाषा म्हारी स्यान है, भाषा है सिणगार ।
भाषा म्हारी आंतड़ी , भाषा है रुजगार ।9।
बो दिन कद तक आवसी, बोलां मायड़ भास ।
बोलां भाषा ओपरी, रोटी लागै घास ।10।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.