कागद राजस्थानी

शनिवार, 3 सितंबर 2011

कुचरणीं

** कुचरणीँ **
 
1.
हाल
घूंघट काढै दादी
कठै है अजादी |
2.
कोई सासू
हाल नीँ देवै
भू नै अजादी !
 
3.
थकां जीन्स
नेतावां नै
पै'रणीं पड़ै खादी |

-फेसबुक-
 
अदबदी कामणगारी
थोबड़ा पोथी
जकी मेँ बातां 
निग्गर थोड़ी
पण ज्यादा थोथी !
 
-ब्लाग-
 
ईं सदी रो
स्सै सूं मोटो रोग !
 
-ई-मेल-
 
ऐक और
फीमेल
जकी
बणा राख्या है
लोगां नै रेल !
- पै'लो सुख -
 
पै'लो सुख
निरोगी काया
इण बात माथै 
.ऐक जाम और भाया !

- लेखक -

 
दळियो दळण आळी मसीन
जकी
दळियो दळ्यां राखै
अब चावै
किणीँ नै भावै या नीँ भावै
उण री से'त माथै
कोई फरक नीँ आवै !
 
- पंखो -
 
करतां ई खटको
पंखो करै लटको 
- रिस्ता -
अंगरेज देग्या
दो सबद
अंकल अर अंटी
...जकां बजा दी
सगळै रिस्तां री घंटी ।

- चसमो -

 
लूंठो बेईमान
खाल खावै
नाक री
अर
हाजरी भरै
आंख री ।

- फोन -

 
लूंठो चुगलखोर
जको
इन्नै री बात
बिन्नै करै
अर लोग
इण चुगलखोरी रा
पईसा भरै ।
- सीटी -
 
सीटी सूं
लुगाई झट पट जावै
आ बात
.आज समझ आवै
जद रसोई मेँ जोड़ायत
कूकर आगै थम जावै !

- ग़ज़ल -


प्रेमी रै मुंडै सूं
सुण'र ग़ज़ल
प्रेमिका होगी पज़ल
सोचण लागी
ओ मरज्याणोँ तो
आभै मेँ जासी
म्हां सारु
चांद तारा ल्यावण नै
फेर तो
कई बरस लागसी
पाछो आवण मेँ
कांईँ सार है
ओ रिस्तो निभावण मेँ !
* रेल रा खेल *
 
रेल रा
भूंडा खेल
...मुसाफ़रां नै
मारयां बिनां
छोडै नीँ गेल !

* जातरा *

 
जातरा सारु
चडो तो हो
रेल गाडी
पण
घरां कियां पूगस्यो
लाडी ?

* मुआवजो *

 
जे
आपनै चाईजै
घणोँ मुआवजो
तो भाया
रेल सूं
गांवतरै जावज्यो !

* हादसा *

 
जे
रेल हादसा टळै
तो रेलिया भष्टाचार री
दाळ कियां गळै ?

* रेल मंत्री *

 
कोई देखो रे
भारत री जन्मपत्री
कद मिलसी
भारत नै रेलमंत्री ?
 
* पुलिस-१ *
 
मिनखां रा
सळ काढण आळी उस्तरी
...जकी घणीं तप्यां पछै
बाळ देवै
इणीं खातर
भला मिनख
इण री तपत देख
पईसां रो छांटो देय’र
दूर सूं ई टाळ देवै !

* पुलिस-२

मारणों गोधो
जकै रै आगै
भाज्यां ई
पार पडै़
खड़्यो रै’यां
मार पडै़ !

* ठाणों *

कटखावणै देवता रो थान
जकै नै धोक्यां खतरो
अर नीं धोक्यां घणों खतरो
थाणै रै गेलै सूं पग रोको
जे अकल है तो
इण नैं
लारली गळी सूं धोको !
 
*बाबो*
 
लीला आक
कियां चाबां
...बाबो तो
घणों ई कै’वै दाबो
पण
जींवतै नै कियां दाबां !

* टाबर *

 
सगळा टाबर
खुद नै समझै
बाप बराबर !

* आलू *
 
मटर
टमाटर
गोभी साथै
राखै यारी
है नीं बेटो चालू ?

* साक्षरता *

 
गांव में
आई साक्षरता
बूढिया पढै
काम सूं डरता !

*मा*
 
सांस आवै दोरा
पण मा घालै
गूदडां में डोरा !

- सगाई -

सगाई में
...सग्गा ई मिलै
बीन-बीनणीं नीं !
जिण तरै
ठगाई में
ठग्गां रो काम
उणीं तरै
सगाई में
सगां रो काम !

- जोग-संजोग -
म्हैं कै’यो-
म्हारी बींटी गमगी
बां कै’यो-
जोग री बात है !
म्हैं कै’यो-
म्हारी बींटी लाधगी
बां कै’यो-
संजोग री बात है !
म्हैं कै’यो-
बींटी ना गम्मीं,ना लाधी
धक्कै सूं फ़ोडा़ पड़ग्या
बींटी तो खूंजै में ई पडी़ ही !
बां कै’यो-
जोग-संजोग री बात 
* पंच *
 
काम
कित्तो ई होवै
भलांईँ टंच
...राजी नीं होवै
कदै ई पंच !

* प्रमुख *
 
बण्यो प्रमुख
गयो दुख
अर
आयो सुख !
 
- दादी -

दादै नै
...कांईं ठाह
कठै लाधी
टाबरां रै खेलण री
आ प्यादी !

- दादो -

सो में
पांच घटै
दादो हाल
मूंजडी़ बटै !

- मासी -

लागै
मा सी
पण
सांची बात
बापू जी
क्यूं बतासी !

- साळी -

ऐक रूंख री
दो डाळी
ऐक जोडा़यत
दूजी साळी !

- साळो -

जे है
सासरै में साळो
तो लाडी
फ़ेर थे
कांईं भाळो ?

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