कागद राजस्थानी

सोमवार, 8 अगस्त 2011

कुचरण्यां

*कुचरणीँ*
 
-फेसबुक-
 
अदबदी कामणगारी
थोबड़ा पोथी
जकी मेँ बातां
...निग्गर थोड़ी
पण ज्यादा थोथी !
 
-ब्लाग-
 
ईं सदी रो
स्सै सूं मोटो रोग !
 
-ई-मेल-
 
ऐक और
फीमेल
जकी
बणा राख्या है
लोगां नै रेल !
- पै'लो सुख -
 
पै'लो सुख
निरोगी काया
इण बात माथै
...ऐक जाम और भाया !

- लेखक -
 
दळियो दळण आळी मसीन
जकी
दळियो दळ्यां राखै
अब चावै
किणीँ नै भावै या नीँ भावै
उण री से'त माथै
कोई फरक नीँ आवै !
 
- पंखो -
 
करतां ई खटको
पंखो करै लटको 
- रिस्ता -
 
अंगरेज देग्या
दो सबद
अंकल अर अंटी
...जकां बजा दी
सगळै रिस्तां री घंटी ।

- चसमो -
 
लूंठो बेईमान
खाल खावै
नाक री
अर
हाजरी भरै
आंख री ।

- फोन -
 
लूंठो चुगलखोर
जको
इन्नै री बात
बिन्नै करै
अर लोग
इण चुगलखोरी रा
पईसा भरै ।
- सीटी -
 
सीटी सूं
लुगाई झट पट जावै
आ बात
...आज समझ आवै
जद रसोई मेँ जोड़ायत कूकर आगै थम जावै !

- ग़ज़ल -

प्रेमी रै मुंडै सूं
सुण'र ग़ज़ल
प्रेमिका होगी पज़ल
सोचण लागी
ओ मरज्याणोँ तो
आभै मेँ जासी
म्हां सारु
चांद तारा ल्यावण नै
फेर तो
कई बरस लागसी
पाछो आवण मेँ
कांईँ सार है
ओ रिस्तो निभावण मेँ !

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