कागद राजस्थानी

शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014


लघु कथा


कुचरणीँ

-फेसबुक-
अदबदी कामणगारी
थोबड़ा पोथी
जकी मेँ बातां
निग्गर थोड़ी
पण ज्यादा थोथी !
-ब्लाग-
ईं सदी रो
स्सै सूं मोटो रोग !
-ई-मेल-
ऐक और
फीमेल
जकी
बणा राख्या है
लोगां नै रेल !
पै'लो सुख -
पै'लो सुख
निरोगी काया
इण बात माथै
ऐक जाम और भाया !

- रिस्ता -
अंगरेज देग्या
दो सबद
अंकल अर अंटी
जकां बजा दी
सगळै रिस्तां री घंटी ।
- सीटी -
सीटी सूं
लुगाई झट पट जावै
आ बात
आज समझ आवै
जद रसोई मेँ जोड़ायत
कूकर आगै थम जावै !

- ग़ज़ल -

प्रेमी रै मुंडै सूं
सुण'र ग़ज़ल
प्रेमिका होगी पज़ल
सोचण लागी
ओ मरज्याणोँ तो
आभै मेँ जासी
म्हां सारु
चांद तारा ल्यावण नै
फेर तो
कई बरस लागसी
पाछो आवण मेँ
कांईँ सार है
ओ रिस्तो निभावण मेँ 

लुगाई : दो चितराम



1-गांव में लुगाई

डांगरां रै निवड़ग्यो
नीरो-चारो-तूड़ी
रैयो नीं कोई चारो
बा चूड़्यां कानीं देख
ऐकली बड़बड़ाई
अब कठै है चलस
सोनै री चूड़ी री
आं नै बेच करां
इंतजाम तूड़ी रो
बापड़ा ऐ जीवड़ा
भूख तो नीं मरै
चूड़ी पैर्‌यां
काईं पेट भरै !

सोच विचार'र
बण झट सळटाई चूड़ी
चूड़ी रा रिपियां सूं
घर में न्हखाली तूड़ी !
*
2-सैर में लुगाई
....
भायली रै हाथ में
फोन देख ब्लैकबेरी रो
बा बळगी
ईसकै री आग में
सोनै री चूड़्यां कानीं देख
ऐकली बड़बड़ाई
अब कठै है चलस
सोनै री चूड़ी रो
बिना चूड़ी
किसो सुहाग गमै है
ब्लैकबेरी बिन्यां तो
सांपड़तै ई इज्जत गमै है !

सोच-विचार'र
बण चूड़ी बेची
करियां बिन्यां देरी
मोलाय ल्याई ब्लैकबेरी !

मानसूनड़ो

मानसूनड़ो रुळ परो, होग्यो अब सुन्नमान ।
बिरखा कूकर बरससी, कियां निपजसी धान ।1।
धोरी पाळी आसड़ी, टूटै पड़तख आज ।
बिरखा करदे बादळी, मधरी मधरी गाज ।2।
बादळ थारै कारणै , कळपै मुरधर माय ।
बरसादै जे छांटड़ी, कळी कळी खिलजाय ।3।
पाणी साम्यां बादळी, डोलै अंबर जाय ।
लाड लडावां मोकळो,बरसै क्यूं नीँ आय ।4।
आभो छोडो बादळी, बैठो मुरधर आय ।
नित रा लेवां वारना, लेवां गळै लगाय ।5।
बिरखा बरसी बापजी, धरती धारयो धीर ।
जळ थळ होया ऐकसा, धरती पसरयो नीर ।।

*अजादी*

गोरा भाज्या छोडगै ,होयो देस अजाद । 
हाल गुलामी सांकड़ै,चौसठ बरसां बाद ।।
भारत माता आपणीं , खड़ी उडीकै आज ।
भिस्टाचारड़ो मेटसी , पूत बचासी लाज ।।
नीत सुधारो आपरी , पाछै भूंडो लोग ।
खुदरै सुधरयां मिटैलो, भिस्टाचार रो रोग ।।
अजादी री सोगन खा , तजो खुद भिस्टाचार ।
खुद मरस्यो जे भायला, हो सी जय जयकार ।।
आज अजादी आपणीँ, सांसां सूं अणमोल ।
पूत धरम अपणाय लै,भारत माता बोल ।।

डांखळो


फोज में भरती होग्यो सेठां आळो छोरो ।
गोळी ना लागै इण सारु करवायो डोरो ।
            छिड़गी छेकड़ जंग
              लाई होयो तंग
बोल्यो पेँट भरै, कठै है ओट खातर धोरो ।।
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