कागद राजस्थानी

शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014

* आव परी * [ लोरी ]

 आव परी तू आव परी ।
मीठी नीँदां ल्याव परी ।।
लाली म्हारी जागती ।
राली तकिया मांगती ।
थारै हाथां आव धरी ।
आव परी तूं आव परी ।।
लाली नींदां सोयसी ।
मीठा झोला लेयसी ।
दुख नींदां मेँ आय हरी ।
आव परी तूं आव परी ।।
सुख री नींदां ल्याव परी ।।
मीठा सुपना ल्याव परी ।।

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