कागद राजस्थानी

गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

*बाबा बदनाम*


राजा भरतो हाजरी, बाबां आगै जाय ।
अब बाबा रोज मंडै, राजा आगै जाय ।1।
राजा करतो चाकरी,बाबां चरणां बैठ ।
अब तो चाटै पगथळी, बाबां खोई पैठ ।2।
राजा सोंतो ओजकै , बाबा लेंता चैन ।
राजा सोवै चैन सूं, बाबा जागै रैन ।3।
बाबा तपता मोकळा , धन सूं जाता दूर ।
बाबां रोप्या बिणजड़ा, लाज्या भगवां पूर ।4।
बिरम ग्यान नै ध्यांवता ,बाबा हा निसकाम ।
रगां बिराजै कामड़ो, बाबा है बदनाम ।5।

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