कागद राजस्थानी

गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

सातूड़ी तीज

त्यूंआरा रा मज़ा तो फ़गत राजस्थान में इज ! भां-भांत रा त्यूंआर अर भां-भांत री खावण आळी चीजां ।
राजस्थान में दो तीज । पैली सावण री तीज यानी छोटी तीज । दूजी भादवै री तीज यानी बडी तीज ।
आज बा ई बडोडी़ तीज है । इण तीज नै कजळी तीज, हरियाळी तीज, सातूड़ी तीज, मोटी तीज कैईजै ।- इण तीज माथै अनाज नै सेक-पीस’र सातू बणाईजै अर उण में धपटवां घी, काजू,किसमिस , नोजा,पिस्ता, बिदाम घालीजै अर अर चान्दी रा वर्क लगाईजै । पछै बैन-बेटी रै सासरै पुगाईजै । एक बेटी रो , एक जुवाई रो अर एक-एक सासू-सुसरै रो अर एक-एक बटडी़ ताबरियां री । एक -एक सातू सवा-सवा किल्लो रो होवै अर बटडी़ पाव-पाव री। थाळी में सजायर पुगाईजै अर साथै फ़ळ भी होवै ।
बरत रो विधान
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आज रै दिन लुगायां बरत राखै अर सिझ्या चान्द नै देख’र ्सातू खाय’र बरत खोलै ।
सातू आकडै़ रै पत्तां माथै राखीजै अर गोडै री नीच कर हाथ काढ़’र जीमै । साथै फ़ळ मिठाई , अर दही रो फ़िद्दर भी लैवै । बरत रै पैलडै़ दिन रात नै बारा बज्यां बाद धमोळी करीजै । धमोळी में चोखा-चोखा पकवान ,मिठायां अर फ़ळ अरोगीजै ।
सातूडी़ तीज पर भोत गीत गाईजै । एक गीत ओ भी "आज सिंधारा तड़कै तीज-छोरियां नै लेयग्यो गोगो पीर "
ओ गीत इण बात रो संकेत कै अब गोगो आ
सी अर गोगा नवमी पर गोगो धोअक्स्यां ।

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