कागद राजस्थानी

बुधवार, 23 अप्रैल 2014

<> नेता मोटो राम सूं <>

रोटी सेकै आपरी , लगा देसड़ै आग ।
कळपै सगळो देसड़ो , नेता बागो बाग ।।
देसधरम री नीतियां , दीवी सगळी टाळ ।
रावण बणग्या नेतिया , लंका आळी ढाळ ।।
जात धरम में बांटगै , रोपै उण में राड़ ।
कियां बचैलो खेतड़ो , खावण ढूकी बाड़ ।।
कीं दिन रैवै राज में , कीं दिन रैवै जेल ।
जाण सकै ना राम जी , नेता जी रो खेल ।।
नेता मोटो राम सूं , बेटो उण रो बाप ।
झींटा खोसै नेतियो , बेटो देवै थाप ।।
भासण भूंसै नेतिया , चोड़ी करगै राफ ।
कुरसी माथै बैठगै , करै खजानो साफ ।।
हाथ दिखावै नेतिया , कर कुरसी धणियाप ।
सगती सगळी हाथ में , नाप सकै तो नाप ।।
गांवां आया धाड़वी , मारो करड़ी चोट ।
धूड़ चटाओ भायलां , मत ना देवो बोट ।।
कीमत जाणों बोट री , सीमो मत ना होठ ।
 कामल ढूंढो नेतिया , छोडो ठूंठा ठोठ ।।
रात काढदी आंख में , आई कोनीं नींद ।
इतरा पैदल चालतां , पूग जांवता जींद ।।
भासण आळी गोळती , बांटै नेता रोज ।
जनता चूसो ठाट सूं , पूरी देवै डोज ।।
जनता चावै बावळी , देस-धरम रो मान ।
नेता घूमै फाड़ता , भासण आळा थान ।।
नेता ढूंढै जीतड़ी , बोट मसीना बंद ।
जन सेवक ई जीतसी , जनता काट्यो फंद ।।

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