कागद राजस्थानी

बुधवार, 23 अप्रैल 2014

*मतलब समझो साफ*

मतलब सटै बात करै , मतलब सूं ई प्रीत ।
ऐड़ा नुगरा भायला , कद होया है मीत ।।
मुळक मुळक बातां करै , ढीली राखै राफ ।
मतलब काढण ढूकिया , मतलब समझो साफ ।।
नित री मांडै हाजरी , लुळ लुळ करै सिलाम । 
समझो म्हारा भायलां , बो काढैला काम ।।
घरां बुलावै आपनै , करै खातरी धाप ।
काम काढ़सी आपरो , चाळा समझो आप ।।
जिको दिखावै आप सूं , भायां जेड़ो हेत ।
बो ठोकैलो फींच में , बेगा जाओ चेत ।।
कांदो मिलै न गूंदळी, चाय मिलै ना खांड ।
बरतन भांडा सांभगै, धरद्‌यो ऊंची टांड ।।
कळजुग भूंडो आवियो , रिपियै रा भी भाव ।
सांभै नीं परमेसरा, बेगा बेगा आव ।।
रिपियो रुळग्यो रेत में, डॉलर चढ्यो अकास ।
रिपिया होसी हाथ में, चरणों पड़सी घास ।।
रिपियो पड़ग्यो बैसकै , डॉलर होयो सवार ।
रिपियै नै कुण सांभसी , कुण नै पूछां यार ।।
रिपिया बंटै देस में , पड़ता लागै बोट ।
भासण आळा बोलसी, ढूंढो म्हां में खोट ।।
बोटां आळी टैम में, करजा करसी माफ ।
जीत्यां पाछै बापजी. खूंजा करसी साफ ।।
कुरसी राखण आपरी. दिया खजाना खोल ।
कुरसी बंच्या बाद में , लेसी पाछा तोल ।।
बोटर गूंगा बावळा , फिरसी नेता लार ।
जीत्यां पाछै नेतिया , चढता फिरसी कार ।।
पढो विग्यापन मोकळा, कितरा होग्या काम ।
नीं बोलैला बापजी . बधग्या कूकर दाम ।।
फोकट बंटग्या लोटिया, होग्यो जग परकास ।
साडी कामळ सींत में , बोटां खातर खास ।।
गांधी थांरा बांदरा , कूदै नो नो ताळ ।
बटका भरसी डील में ,टाळ सकै तो टाळ ।

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