कागद राजस्थानी

गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

*कियां जीयां बाबा*

म्हे जाणां कियां म्हे जीयां बाबा ।
नित लोई रा घूंट पीयां बाबा ।।
अब कांदा मिलै ना मिरच मसाला ।
दूध नै बैठ्या नित टीयां बाबा ।।
रिपियो खावै रोज गुड़क गुळाची ।
जाय बैठ्यो डॉलर छींयां बाबा ।।
मूंघीवाड़ो ओज्यूं और बधसी ।
राज घुरकावै नित ईंया बाबा ।।
संत अंत ले आज ढूक्या लूंटण ।
किंया साम्भा इज्जत धीयां बाबा ।।
खुद रै हाथां म्हे थरप्या पाटवी ।
म्हानै पीसै भोत मींयां बाबा ।

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