कागद राजस्थानी

गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

राम भरोसै देसडो

खूब खटै ओ देसडो,नीं मैणत रो अंत ।
खावण खंडा मोकळा, अफसर नेता संत ।।
बणग्या म्हारै देसडै, मिन्दर देवरा थोक ।
घर बणावै गरीबडो , च्यारूं कूंटां रोक ।।
राम भरोसै देसडो, आपी खावै मार । 
कोई घालै बोटडा,कोई देवै धार ।।
नेता नाळा अर नदी , चालै खुद री चाल ।
कोई जीवो या मरो , ऐ नीं पूछै हाल ।।
नेता डेडर एकसा , बोलता टांय टांय ।
नेता बोलै बोट में,डेडर बिरखा मांय ।।

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