कागद राजस्थानी

शुक्रवार, 11 अप्रैल 2014

काळी जरड़ी जाजम

सोनळिया धोरां
पसरी है सड़क
किणीं कुमाणस
बिछाय दी जाणैं
मखमल माथै
मिनख भखणीं 
काळी जरड़ी जाजम
जिकी लागै 
बेकळा नै आणखावणीं
आवै बेकळा
उड-उड घड़ी-घड़ी
इण नै ढकण सारू !

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