कागद राजस्थानी

गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

पूजो मिनखा प्रीत

आंख आपरी तेज है , देखै पड़दां पार ।
खुद रै भीतर मैलड़ो , क्यूं नीं दीठै यार ।। 
काया थांरी फूटरी , कंचन वरणों भान ।
लछण थांरां कुळछणां , बण बैठ्या भगवान ।।
आग लगाओ जगत में , खुद रा सेको रोट ।
डूब मरो रे निसरमो , थांरै कोठै खोट ।।
खोट कमाओ धपटवां , थान जगाओ जोत ।
खूब पटाओ देवता , चौड़ै आग्या पोत ।।
गाभा पैरो ऊजळा , मनड़ां राखो मैल ।
मिनखपणों है भायला , थांरै आगै फैल ।।
बातज मानों सांचली , पूजो मिनखा प्रीत ।
मिनखपणैं नै पूजतां , जग जाओला जीत ।।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.