कागद राजस्थानी

गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

. *तीन कुचरणीं*

1.
आया कोनीं
चुणावां में बोट
नेताजी रै
चढगी घोट
बोल्या-
अब किंयां सिकसी
राख में रोट ?
1.
नेताजी रो जद
जनता में घटग्यो रेट
दियो ग्यापन
बैठग्या धरणैं
बोल्या-
उठाओ अठै सूं
ओ कोटगेट !
3.
नेताजी रो रथ
पारटी में होग्यो
जद व्यरथ
नेताजी चाल्या चाळा
सुणलै रे ऊपरआळा
बुढापै री लकडी
कुरसी झला तकडी !

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