कागद राजस्थानी

शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014

*बिरखा*

बरसो मत नां बादळां ,बरस्यां दुख है भोत ।
साजन सोवै खेत में , म्हानै आवै मौत ।।
टूटी फूटी झूंपड़ी , चौवै च्यारुं मेर ।
कितसी ढाळूं ढोलियो, बिरखा काढै बैर ।।
टप टप टोपा तन पड़ै, पिंडै लागै लाय ।
साजन भंवै आंतरा, बादळ दै सिळगाय ।।
गांव बिचाळै टापरी, आंगण साम्हीं पोळ ।
संग नहावै सायबो , बरस्यां बिगड़ै डोळ ।।
छम छम बरस्या बादळा, टप टप चौई छात ।
साजन ढाबै छात नै, आंख्या थमगी रात ।।

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