कागद राजस्थानी

गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

बोटां आळी गाय

थूक बिलोवै नेतिया , काढै गाळां लाख ।
मरगी जनता बापड़ी , उण री कांईं साख ।।
जनता तो है बापड़ी , बोटां आळी गाय ।
नेता अरणां सांडिया , चोखी आई दाय ।।
टैक्स चुकावै मोकळा , आवै कीं नीं हाथ ।
जनता रोवै बापड़ी , साय करो रुघनाथ ।।
जनता धोकै देवरा , पांती आवै मौत ।
नेता भूंसै मोकळा ,नोट कमावै भोत ।।
कुरसी खातर नेतिया, बैड़ा बोलै रोज ।
एकर कुरसी रूधलै , पांच साल री मौज ।।
हार्‌योड़ा कूकै घणां , जीत्यां आवै स्यांत ।
जनता जाओ दरड़ में, नेता राजा भांत ।।

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