कागद राजस्थानी

गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

* घर में पूजो देवता *

घट में बैठ्या देवता , बारै ढूंढो आप ।
बारै घूमै मौतड़ी , घर में करल्यो जाप ।।
खोटी करगै कामड़ा , तीरथ जाओ आप ।
खरची खूटै गांठ री , दुख पाओ अणमाप ।।
देवी मिली न देवता , डूंगर चढग्या आप ।
पाछा आया गुड़कता, परकत रै परताप ।।
घर नै लूंटै चोरड़ा , बारै घूमो आप ।
घर में पूजो देवता , मिटसी सै संताप ।।
शंख बजाओ मोकळा , ढोलां देवो थाप ।
छोड मजूरी भायला , खास्यो कांईं आप ।।
मायड़ बाबो टाबरी , देवां जेड़ी छाप ।
आं री भरल्यो हाजरी, मिटसी सारा पाप ।।
सांचो तीरथ मावड़ी, मोटो मिन्दर बाप ।
आं नै घर में पूजल्यो, कटसी सारा पाप ।।

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