कागद राजस्थानी

गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

* पंचलडी *

कविता लिखै तो भाई कविता लिख ।
अळसीडै सारू पण बळीता लिख ।।
पी खून सोरी जीवै जूण जिका ।
बां मिजळां सारू कीं फजीता लिख ।।
मरी तिरसी थांरी पीढ़्‌यां कितरी ।
लगोलग बगती कोई सरिता लिख ।।
रजधानी ताईं बधग्या झाड़का ।
जनता रै हाथां की पळीता लिख ।।
थांरी भाषा लेयग्या मिजळा ।
मत चूक चेत बावळा चिंता लिख ।।

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