कागद राजस्थानी

गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

*सावण रा दूहा*

सावण आयो सायबा, बोलो ओम शिवाय ।
आपां दोनूं एक हां , और न आवै दाय ।।
भटकै मिंदर देवरां , बोलै ओम शिवाय ।
घर में बैठ्या बूढिया , रोटी मिलै न चाय ।।
पाणी ढोळै मूरत्यां , ऊपर पुहुप चढाय ।
तिरसा कळपै डोकरा, पाणी मिलै न चाय ।।
भोळो बाबो जीमसी, टींगर घोटी भांग ।
खावण ढूक्यो बूढियो , करतो भरतो सांग ।।
भांग धतूरा आकडा , भगतां करिया त्यार ।
पाणीं टेक्यो दूध में , शिवजी फसग्यो यार ।।

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