कागद राजस्थानी

शनिवार, 26 जनवरी 2013

दूहा

कुरसी जावै बेलियो, आओ मांडां चींत ।
बोटां आडी भायलां, कुण मांडी है भींत ।।
राजकाज सै छोडगै, कुरसी सांभो आज ।
बिन कुरसी रै बापजी, किंयां मिटसी खाज ।।
जनता गूंगी भेड है , फेर घालसी बोट ।
कुरसी जासी भायलां, आ जे चढगी घोट ।। 
जीम्या जीता जीमग्या, अब थे डाटो हाथ ।
भीड़ बीच में जायगै, बोलो जनता नाथ ।।
नारा सोधो फूटरा, जनता गूंगी सांड ।
भासण सुणगै तूठसी, बोट घालसी पांड ।।

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