कागद राजस्थानी

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रविवार, 2 जून 2013

*सुणल्यो डंकै चोट*

जातरां ढूंढै बोटड़ा ,  बैठण  कुरसी राज । 
कोई बोलै सन्देसड़ा , कोई कथै सुराज ।।
गरमी  भारी कोझकी , भूंडा  बेजां  हाल ।
कीं  बोटां रै  कारणै ,  नेता  बाळै  खाल ।।
खेत  खळां  नै  छोडगै , घूमो नेता  लार ।
नेता कुण रो बापजी, मत ना खाओ मार ।।
धरती कोनीं कामड़ा, भाषण है अणथाग ।
कुण जाणै कुण थामसी, भाषण आळी आग ।।
कोई बोलै कर दियो , देखो कित्तो विकास ।
कोई सित्यानास कथै, कियां करां बिसवास ।।
ना भाषा  है न पाणीं , ना  बोलण में सार ।
भाषा सुण सुण ओपरी , डूब्या काळी धार ।।
बोटज मांगो मोकळा, बैठो जातरा रथ ।
भाषा देवो बापजी, मत ना करो अनरथ ।।
म्हे देवांला ऐसकै , भाषा  खातर बोट ।।
बोलै  गूंगा भोळिया . सुणल्यो  डंकै चोट ।

शनिवार, 3 सितंबर 2011

मायड़भाषा रा दूहा

मायड़भाषा रा दूहा

आक चाबतां बापजी, होया चौसठ साल ।
आम्बा कदसी चूसस्यां, ऊभो ऐक सुआल ।1।
मुंडा म्हारा सील है, बोलां कीकर राज ।
.मन री मनड़ै दाबगै , रोवां गूंगा आज ।2।
भाषा थारी कैद में, करो कनीँ आजाद ।
खोलां मन री गांठड़ी, देवां घण लखदाद ।3।
सगळा प्रदेस आपरी , भाषा राखी टाळ ।
म्हारी भाषा मांगतां, क्यूं काढो थे गाळ ।4।
डांगर कांटा कागला , बोलै खुद रा बोल ।
भूंडा म्हारा भाग है , मुंडो सकां न खोल ।5।
 भागी चीड़ी कागला, बोलै मायड़ भास ।
निरभागी म्हे मिनखड़ा, बोलण छूटी आस ।6।
विधान सभाज आपरी, चुणां घाल खुद बोट ।
बोलै भाषा आपरी,बजै बठै बै ठोठ ।7।
हिन्दी होवो हिन्दवाणी, बणो हिंद री ताज ।
राजस्थानी मत राखो , भाषा सूं मो'ताज ।8।
भाषा म्हारी स्यान है, भाषा है सिणगार ।
भाषा म्हारी आंतड़ी , भाषा है रुजगार ।9।
बो दिन कद तक आवसी, बोलां मायड़ भास ।
बोलां भाषा ओपरी, रोटी लागै घास ।10।

मंगलवार, 7 जून 2011

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