कागद राजस्थानी

शनिवार, 21 जनवरी 2012

एक कविता


♥ भोत अंधारो है ♥
होया करै जेड़ो
है दिन
चोगड़दै पण भंवै
साव अंधारो
सुरजी नै चिडावंतो !

कुण देखै सूई
जठै लुकग्या हाथ
दिखै ई नीं
खुद रै पगां रो कादो
भोत अंधारो है
थकां सुरजी !

है तो सरी सुरजी
आभै में पकायत
है कठै पण ठाह नीं
फिरग्या आडा
जळबायरा बादळिया !

इयां तो
ढबै नीं सुरजी
निकळसी एक दिन
बादळियां नै फटकार
पळपळावंतो
आभै रै सूंवै बिचाळै !

एक कविता

.
[<>] लुक्को लाडी [<>]
नेता जी रै चढगी घोट ।
दादी बोली घालो बोट ।।
डेडर भांत बोल्या नेता ।
आज काल में पड़सी बोट ।।
जात पांत रा करसी खेल ।
मरजादा पर धरसी चोट ।।
दादी बोली लुक्को लाडी ।
ठाकुर जी री ले ल्यो ओट।।
खोट ढूंढसी आपां मांय ।
नेता जी में कोनीं खोट ।।
अळगा होय आपां बैठ्या ।
नेता सगळा ऐकम जोट ।।
कुरसी माथै जम परा ऐ ।
भीतर राख सेकसी रोट ।।
देस बचाणो तन्नै लाडी ।
हाथां ले लै भाया सोट ।।

एक कविता

प्रीत

प्रीत पांगळी 
चालै हळवां
पकड़ आंगळी
कथी अलेखूं
मथी कहाणीं
निकळी कूड़
पूगी भागती
फगत ऐकली
पगां उभाणीं ।

मंगलवार, 18 अक्टूबर 2011

बैबी हैप्पी कोलेज,हनुमानगढ़ जंक्शन खानीं सूं सम्मान


राजस्थानी लोक संस्थान,नोहर खानीं सूं सम्मान


महाकवि कन्हैया लाल सेठिया मायड़ भाषा सम्मान:छोटी खाटू



पंचलडी़ री "माणक" में समीक्षा


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