कागद राजस्थानी

रविवार, 1 अप्रैल 2012

दूहा

[<>] सांचला दूहा [<>]

हेत दिखावै मोकळो , कर कर चोड़ी राफ ।
उण नै घाती मानजो , बात पतै री साफ ।1।
हां जी हां जी बोलगै , जको साम्भै बात ।
ऐक दिन आप देखज्यो , बो ई करसी घात ।2।
भेळै बैठ गोठ करै , सीसी खोलै रोज ।
थारै देसी फींच में, माथै मण्डसी मोज ।3।
काको कैवै कोड सूं , घणो दिखावै हेत ।
बोइज नुगरो आपरो, खोस खायसी खेत ।4।
घर में आवै रोज गो , साथ करावै काम ।
थारी हूणी आयगी , समझो म्हारा राम ।5।
भायला मिलै जोग सूं , दुसमीड़ा अणजोग ।
जरदो खावां कोड सूं , आपी आवै रोग ।6।

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