कागद राजस्थानी

रविवार, 1 अप्रैल 2012

धंवर डाकण

[<0>]धंवर डाकण[<0>]

हाल तो बेहाल है
मुरधर सांकड़ै
कुळछणो बायरियो
हेम सूं घाल भायला
बगै थड़ी करतो चौगड़दै
रूप धार धंवर रो !

उतराधी पून पापण
बण डांफर
करै रमतां
खावै गुळाच्यां
मुरधर री छाती
घालै छेकला
हेम री साथण
धंवर डाकण
बैठगी ले गोदयां
त्या तकात रोक्यां
मुरधर रा म्होबी
धोरयां रै ठसगी फेफ्पी !

फूस-पानका
रूंख-झाड़का
आला-सीला
तप्यां तावड़ो
करै वसीला
भुरट-मुरट
सीवण-धामण
बूई-बूर
सोधता सूरज
मरग्या झूर
धंवर घुमायो
भूंडो भूण
लेयगी जूण
कर मजबूर
अळगी दूर !

आ धंवर धूजणीं
छंटसी देखी
सूरज बापजी
आसी देखी
गोदयां ले मुरधर नै
बिलमासी देखी
छुड़ा चा-पकौड़ी
छाछ-राबड़ी
खड़ासी देखी
धोरां री गोदयां
धोरी धरमी
चढासी देखी !

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