कागद राजस्थानी

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शुक्रवार, 1 जून 2012

जोनियो जाडू

जोनियो जाडू
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म्हारो दिल टूटग्यो
दादी सूं बोल्यो
जोनियो जाडू
दादी बोली-
कोई बात नीं मला
च्यार दिनां में देखी
आपी जुड़ जासी
नित खाया कर
गूंद रा लाडू !

रविवार, 20 मई 2012

हंसोकड़ी बात

 हम्बै
म्हैँ एक छोरै नै कैयोः 
राजस्थानी मेँ लिख्या करो ! 
तो बण भच्च देणीँ सी लिख्यो--हम्बै !
म्हैँ कैयो-ओ कांईँ है ?
छोरो बोल्यो-राजस्थानी !
म्हैँ बोल्यो-हम्बै !
छोरो फेर बोल्यो- हम्बै कांईँ ? ओ तो हम्बै ई है !
तीजै पूछ्यो-ओ कांईं ? हम्बै-हम्बै ?
म्है बोल्यो-राजस्थानी !
तो तीजो बोल्यो-हम्बै ! 
जे आ ई राजस्थानी है तो म्हैँ ई लिख सकूं !
म्हैँ बोल्यो-हम्बै ! तो लिख्या कर फेर !
बो बोल्यै-हम्बै !

रविवार, 1 अप्रैल 2012

हंसोकड़ी कविता

*आज हंसोकड़ी कविता*
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[::]कवि अर कवियाणीं[::]
कविता सुणण खातर
कवि सम्मेलन में
कवि साथै
कवियाणी भी आई
रात नै बारा बजे
कवि जी री बारी आई
कवियाणी खड़ी होय
ताळी बजाई !

कवि जी मंच चड़्या

कविता सुणाई
पै'ली ई ओळी सुणाई
"रात पूनम की थी"
कवियाणी बोली
थमज्या-कविता डाट
पैली बता
आ पूनम कुण है
कठै री है किरड़कांट
जकै सागै थूं
रात बिताई है
बीं नै तो देख ई लेस्यूं
मंच छोड
मांचै पर चाल
आज तन्नै भी देख लेस्यूं !

कवि बोल्यो

बा कोई कोनीं
पूनम तो बापड़ी
म्हारी कविता री पात्र है
कवियाणी बोली
बा तो है जकी है
बीं नै जावण दे
म्हैं तो तन्नै भी जाणगी
थूं कित्तोक सुपात्र है
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