कागद राजस्थानी

शुक्रवार, 3 जून 2011

तिहोत्तर बोल्यां री धिराणी है राजस्थानी

तिहोत्तर बोल्यां री धिराणी है राजस्थानी

                            -ओम पुरोहित "कागद "                                      

जिण विध अलेखूं छेतरीय बोल्यां-भाषावां नै आपरै भीतर अंवेरती-सांवटती हिन्दी अनै दूजी भाषावां सांवठी अर लूंठी भाषावां है उणीज भांत राजस्थानी भाषा भी आपरी 73 बोल्यां नै आपरै भीतर अंवेरती-सांवटती ऐक लूंठी अनै थिर-सबळी भाषा है ! जिण भांत हिन्दी नांव री कोई निरवाळी भाषा नीं पण कईऐक भारतीय  भाषावां [43  भाषावां-बोल्यां ] रै समूह नै भेळ’र हिन्दी भाषा कथीजै ! यानी 43 बोल्यां री नेता बोली है हिन्दी ! इणीज भांत राजस्थानी भी कोई निरवाळी भाषा का बोली नीं  पण आपरी 73 बोल्यां री धिराणीं है ! आपरी 73 बोल्यां री नेता भाषा है ! यानी राजस्थान री सगळी बोल्यां रो ऐकठ नांव है राजस्थानी भाषा ! इण बात सूं कई लोग जाण बूझर’र अळगो मतो राखै , यानी कान्नां में कोवा लेवै । पण बां रो अंतस सांच सूं मुकर नी सकै ! ऐडा़ लोग निरमूळ चिन्ता करै कै मेवाडी़, वागडी़,ढुंढाडी़,हाडो़ती,शेखावाटी,मेवाती आद 73 बोल्यां  में सूं कुणसी है राजस्थानी ? ऐडा़ डोफ़्फ़ा लोग इण सांच नै जाणै कै आं बोल्यां री धिराणी ई राजस्थानी है ! बै लोग इण बात रो उथळो आज तांईं नीं दियो कै जे ऐ बोल्यां राजस्थानी भाषा री बोल्यां नीं है तो भळै किण भाषा री बोल्यां है ? ऐ डोफ़्फ़ा जाण बूझ’र  ईं सांच नै  चित नी चितारै कै जिण भांत लारलै सईकै सूं लेय’र हाल तांईं अवधि, बुन्देली, खडी़ बोली, मैथिली,छत्तीसगढी़,ब्रज, अर राजस्थानी हिन्दी में ऐक बोली रै रूप में भणाइजती ही ठीक उणीज भांत राजस्थानी में भी मेवाडी़, वागडी़,ढुंढाडी़,हाडो़ती,शेखावाटी,मेवाती आद 73 बोल्यां ठरकै साथै राजस्थानी में भणाईजसी ! जद हिन्दी री भणाई में  अवधि, बुन्देली, खडी़ बोली, मैथिली,छत्तीसगढी़,ब्रज, अर राजस्थानी  आद बोल्यां अबखाई नें करी तो राजस्थानी भाषा री घर जाई बेट्यां सरीखी उण री बोल्यां मेवाडी़,  वागडी़, ढुंढाडी़, हाडो़ती, शेखावाटी, मेवाती आद 73 बोल्यां राजस्थान में भणाई अनै राज-काज में कियां अनै क्यूं अबखाई खडी़ करसी ? आ बात कोई नीं तो समझै अर नीं समझावै !
                 राजस्थानी भाषा में 73 बोल्यां है तो इण में अपरोगो कांईं है-आ तो ईण री जगचावी खासीयत है-त्यागत है ! दुनियां री कुणसी भाषा में बोल्यां नीं ?  संविधान री आठवीं अनुसूची में भेळीजी थकी भारत री 22 भाषावां में भी 6 सूं लेय’र 65 तक बोल्यां है । गुजराती-27, तमिल-22 , मरठी-65 , बंगाले- 15, पंजाबी- 29, कोंकणीं- 16, उडि़या-24 , नेपाली-06 , मलयालम-14 , कन्नड़-32 , तेलगु- 36, अंग्रेजी- 57, अर हिन्दी में 43 -  बोल्यां है । पण "ठाडै रो डोको डांग नै पाडै़" जीडी़ ई बात---ऐ सगळी भाषावां ठरकै सूं आठवीं अनुसूची में भी सामल है ,राज्यां री दूजी भाषावां  अनै राजभाषावां भी है ! इण में सूं कई भाषावां री तो खुद री लिपि भी नीं है ! जद आं सगळी भाषावां रै ऐक भाषा होवण में फ़रक नीं तो फ़गत अर फ़गत राजस्थानी भाषा अनै राजस्थान्यां सारू फ़रक क्यूं ? ऐक ई देश में कोई चीज  तय करण रा न्यारा-न्यारा मानदंड क्यूं ?

                 भाषा री एकरूपता री बात अनै चिन्ता सगळी दुनियां री भाषावां में रै’वै ! इण सारू दुनियां रा सगळा देश आप - आपरै अठै भाषा विभाग चलावै जको बगत-बगत माथै नया बदळाव करै अर राज रा फ़रमान काढ’र उणां नै बपरावण री हिदायत देंवता रै’वै ! हिन्दी  भी जकी आज है बा सन 1905 में नीं ही ! हिन्दी में भी लगोलग कई बरसां सूं एकरूपता पैटै बदळाव होय रै’या है ! भाषा विभाग अर गृह विभाग बदळाव अनै एकरूपता सारू परिपत्र जारी करता रै’वै ! जिण भांत 1905  सूं आज तांई हिन्दी री एकरूपता सारू सरकारी स्तर माथै काम होयो उणीज भांत जे सरकार राजस्थानी सारू फ़गत एक ई साल काम कर देवंती तो ओ एकरूपता आळो आंटो अनै टंटो कद रो ई मिट जावंतो ! पण सरकार राजस्थानी रो कदै ई भलो नीं सोच्यो ! चावै सरकार होवै ,चावै ब्यूरोक्रेट अर चावै शिक्षाविद होवै , सगळां ई राजस्थानी नै तो हरमेस मेटण री ई खेचळ करी ! आप राजस्थानी री एकरूपता री बात करो--राजस्थानी तो बापडी़ हरमेस आपरी ज्यान बचावण में लाग्योडी़ ई रै’ई !
                सरकार इत्तो कै’र किन्नो काट्टै कै - " राजस्थानी संविधान की आठवीं अनुसूची में नहीं है इस लिए हम कुछ नहीं कर सकते !’   अब आप हिन्दी रै बिगसाव-पसराव अनै एकरूपता री कहाणी जाणों-14 सितम्बर 1949 नै भारत री संविधान सभा हिन्दी नै राजभाषा बणावण री घोषणा करी करी अर संविधान री धारा 351 में ओ स्पष्ट करियो कै हिन्दी आपरी शब्दावली प्रमुखत: संस्कृत सूं लेसी पण गौणत: दूजी भारतीय भाषावां सूं भी लेयसी । पछै 1955 में रघुवीर जी रो पै’लो हिन्दी शब्दकोश आयो । हिन्दी निदेशालय 1960 में, वैज्ञानिक एवम्पारिभाषिक शब्दावली आयोग 1960 अर  61 में ,राजभाषाई विधाई आयोग 1961 में , राजभाषा अधिनियम 1963 में , राजभाषा नियम 1976 में बण्या । नागरी प्रचारिणी सभा भी 1947 , 1953 , 1957  अर 1962 में हिन्दी री एकरूपता अर मानकीकरण री ज़बरी खेचळ करी । राजस्थान विधानसभा 1956 में राजभाषा अधिनियम बणायो । बस अठै सूं ई राजस्थान में हिन्दी थोंपीजगी ! राजस्थान में 1965 में भाषा विभाग बणायो अर उण रै जिम्मे राजस्थान में हिन्दी रै बिगसाव-पसराव रो काम राख्यो ! राजस्थान रो बजट पै’ली बार 1977  सूं हिन्दी में बणावणो सरू करीज्यो ।

                 राजस्थान रै भाषा विभाग राजस्थान में हिन्दी रै बिगसाव-पसराव रो काम जोरदार ढंग सूं करियो ।  हिन्दी रो जम’र प्रचार करियो । हिन्दी रै पख में पोस्टर छपवाया-बंटवाया-चिपवाया । स्कूलां में हिन्दी भाषण-कविता री प्रतियोगितावां करवाई । सरकारी आदेशां-परिपत्रां रा हिन्दी अनुवाद करवाय । दफ़्तरा-स्कूलां में हिन्दी रा टाईपराइटर बंटवाया । हिन्दी में दस्कत करण-करावण री मुहिम चलाई ।  राज रा विज्ञापन , प्रमाण-पत्र ,नियुक्ति आदेश , पदौन्ति आदेश गजट , वित्तीय स्वीकृत्यां , बैठकां रा कार्यवृत , आवेदन , अर चिट्ठी -पतरी हिन्दी में लाज्मी करीज्या । पै’ली सूं लेय’र अठवीं तांईं री भणाई भी भाषा विभाग ई हिन्दी में सरू करवाई । इत्ती खेचळ रै बाद कठै ई लारला 64 सालां में जाय’र राजस्थानी नै मार’र उण री लास माथै राजस्थान में हिन्दी खडी़ होई । इत्ती खेचळ रै बाद जाय’र हिन्दी रै मानकीकरण अनै एकरूपता रा काम कीं होया पण हाल भोत कीं बाकी है । इण मैणत रो दसवों हिस्सो ई जे राजस्थानी सारू करीज जावै तो पछै देखो थे राजस्थानी भाषा रा ठाट ! राजस्थानी भाषा में मानकीकरण अनै एकरूपता रा मसला तो तुरता-फ़ुरती में जडा़मूळ सूं ई निवड़ जावै ।

[]-  ओम पुरोहित"कागद"

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