कागद राजस्थानी

सोमवार, 16 जुलाई 2012

टैम कुजरबो आग्यो

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टैम कुजरबो आग्यो
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टैम कुजरबो आग्यो काका ।
आम आकड़ां लाग्यो काका ।।
ठाह नीं कियां बचगी धरती।।
मिनख मिनख नै खाग्यो काका ।।
काळ जीमसी सगळी धरती ।
धूळ भतूळो छाग्यो काका ।।
खेत धरम रै राखस ऊग्या ।।
कूड़ करम कुण बा'ग्यो काका ।।
मीठो कुंड गंदळो पाणीं ।
कुणसो बड़गै न्हाग्यो काका ।।
भजन राम रा गावण आयो ।
घर में हरजस गाग्यो काका ।।
दिल्ली पूग्यो नेता आपणों ।
हक समूळा पचाग्यो काका ।।
मरो-क जीयो मरजी थारी ।
देस अजाद बताग्यो काका ।।

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