कागद राजस्थानी

सोमवार, 16 जुलाई 2012

दूहा

बिरखा रा पांच दूहा
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बरस झमाझम बादळी , आल्ला करदे ताल ।
तप-तप बैरी सुरजियो , भूंडी खावै खाल ।1।
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बादळ मुरधर भेजदे , सुणलै थूं करतार ।
बिरखा होयां जीवस्यां ,जूण पड़ी मझधार ।2।
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कूलर-पंखा फैल है , सूरज आगै राम ।
बिरखा आयां पांगरै,बळती माणस चाम ।3।
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भीतर ठारै राबड़ी , बारै लागी लाय ।
काया होवै ठारकी,बिरखा दे बरसाय ।4।
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बादळ थारी धण धरा, क्यूं राखी बिलगाय ।
पूत हरियल जामसी ,लगा काळजै आय ।5।

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