कागद राजस्थानी

रविवार, 1 अप्रैल 2012

विचार

.
[]मातृभाषा : दो विचार []

(1)
"मातृभाषाहीन जाति जाति नहीं कही जा सकती । मातृभाषा की रक्षा देश की सीमा की रक्षा से भी अधिक आवश्यक है , क्योँ कि यह पर्वत और नदियों से भी अधिक बलवती है । "
- टॉमस डेविस , प्रख्यात विद्वान
(2)
"मुझे यह कतई सहन नहीं होगा कि हिन्दुस्तान का एक भी आदमी अपनी मातृभाषा भूल जाए या उसकी हंसी उड़ाए , इस से शर्माए या उसे ऐसा लगे कि वह अपने अच्छे से अच्छे विचार अपनी मातृभाषा प्रकट नहीं कर सकता । कोई भी देश सच्चे अर्थों में तब तक स्वतंत्र नहीं हो सकता जब तक वह अपनी भाषा में नहीं बोलता ।"
-राष्ट्रपिता महात्मा गांधी

डांखळो

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(@) होळी पर डांखळो(@)

होळी खेल'र घरां आयो गोमली रो धणी ।
सकल  देख'र लुगाई  होई     अणमणी ।
        कित्ता ई करया न्हाण
        आई ई कोनी पिछाण
थाप्यां सूं कूट कूट धोयो बात जद बणीं ।।

दूहा

[<>] सांचला दूहा [<>]

हेत दिखावै मोकळो , कर कर चोड़ी राफ ।
उण नै घाती मानजो , बात पतै री साफ ।1।
हां जी हां जी बोलगै , जको साम्भै बात ।
ऐक दिन आप देखज्यो , बो ई करसी घात ।2।
भेळै बैठ गोठ करै , सीसी खोलै रोज ।
थारै देसी फींच में, माथै मण्डसी मोज ।3।
काको कैवै कोड सूं , घणो दिखावै हेत ।
बोइज नुगरो आपरो, खोस खायसी खेत ।4।
घर में आवै रोज गो , साथ करावै काम ।
थारी हूणी आयगी , समझो म्हारा राम ।5।
भायला मिलै जोग सूं , दुसमीड़ा अणजोग ।
जरदो खावां कोड सूं , आपी आवै रोग ।6।

दूहा


[<>] बजट रा दूहा [<>]

मूंघीवाड़ो खायग्यो , जीवन्तड़ा री चाम ।
रोको थारा टैक्सड़ा , भली करैला राम ।1।
खरची ओछी बापजी , मतज बढ़ाओ दाम ।
सुण्यो बजट जद आपरो , पूठै लाग्यो डा'म ।2।
रोटी ओखी गांव में ,खट खट खोई चाम ।
भाड़ा बधग्या मोकळा , कूकर छोडां गाम ।3।
चुण चुण भेजां आप नै, आप चलाओ राज ।
ऐड़ी ठोको भोड में , आवै कथतां लाज ।4।
माया ममता छोडगै , झालो जन रो हेत ।
बाकी लखणां बापजी , धोळां पड़सी रेत ।5।

राजस्थान दिवस

 

मायड़ भासा रै बिन्यां, क्यां रो राजस्थान
(राजस्थान दिवस माथै ओ खास लेख)


राजस्थान री थापणा हुई बो दिन हो तीस मार्च-1949। राजस्थान नांव पच्छम रा इतिहासार 'कर्नन जेम्स टाड' 1829 में दियो। इण सूं पैली इण रो नाम राजपूताना हो। ओ नांव जार्ज थामस सन 1800 में दियो। राजपूतानै में 26 रियासतां ही। आं नै भेळ'र भारत में मिलावण री पैली चेस्टा 31 दिसम्बर, 1945 में पंडित जवाहरलाल नेहरू करी। बां उदयपुर में राजपूताना सभा बणाई। दूजी चेस्टा उदयपुर रा राजा भूपालसिंह अर बीकानेर नरेश सार्दुलसिंघजी करी। पैला गृहमत्री सरदार पटेल चौथी चेस्टा में इण राजपूतानै नै भारत संघ में रळायो। आज रै राजस्थान रै एकठ री बी सात चेस्टावां होई। पैली चेस्टा 18 मार्च, 1948 में अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली नै भेळण री। नांव थरप्यो- मत्सय संघ। इणरी राजधानी बणी अलवर। राजप्रमुख बण्या धौलपुर नरेश उदयभान सिंघ। प्रधानमत्री बण्यां शोभाराम कुमावत। दूजी चेस्टा 25 मार्च, 1948 में हुई। मत्सय संघ में कोटा, बूंदी, झालावाड़, बांसवाड़ा, कुशलगढ, शाहपुरा, प्रतापगढ, किशनगढ, टोंक अर डूंगरपुर नै भेळ'र राजस्थान संघ बणायो। इणरी राजधानी कोटा। कोटा रा महाराज भीमसिंह राजप्रमुख। गोकळदास असावा प्रधानमंत्री। तीजी चेस्टा18 अप्रेल, 1948 में होई। इण बार उदयपुर राजस्थान संघ में भिळ्यो। उदयपुर रा महाराजा भूपालसिंह राजप्रमुख। माणिक्य लाल वर्मा बण्या प्रधानमंत्री। चौथी चेस्टा 30 मार्च, 1949 में। इण बार बण्यो बृहद राजस्थान। इण बार रियासतां भिळी बीकानेर, जयपुर, जैसलमेर अर जोधपुर। राजप्रमुख बण्या महाराजा भूपालसिंह। उप राजप्रमुख कोटा महाराव भीमसिंह। हीरालाल शास्त्री बण्या प्रधानमंत्री। पांचवी चेस्टा 15 मई, 1949 में होई। अबकै मत्सय संघ भिळ्यो। छठी चेस्टा 26 जनवरी, 1950 में होई। सिरोही नै भेळ्यो। सातवीं अर छेकड़ली चेस्टा 1 नवम्बर, 1956 में होई। अबकै अजमेर रियासत भिळी। इणी दिन 9 बज'र 40 मिनट माथै राजस्थान अर राजस्थानी लोकराज रै गेलै लाग्या। आज रै आपणै राजस्थान नै बणावण सारू सात चेस्टावां होई। राजस्थान दिवस पण तीजी चेस्टा रै दिन 30 मार्च नै ई मनावणो तेवड़ीज्यौ। राजस्थानी भासा रै पाण बण्यौ राजस्थान। हाल पण राजस्थानी भासा राज-मानता नै तरसै। मायड़भासा रा मौबीपूत सुरगवासी साहित्यकार कन्हैयालाल सेठिया रै काळजै री पीड़ दूहे में बांचो-


खाली धड़ री कद हुवै, चैरै बिन्यां पिछाण?

मायड़ भासा रै बिन्यां, क्यां रो राजस्थान ?

पंचलड़ी

<><> पंचलड़ी <><>

मारै कोझा झपीड़ भायला ।
भूंडी उपाड़ै पीड़ भायला ।।
लोकराज धरै अंटी भीतर ।
कांईं गिणै थूं भीड़ भायला।।
भाई भतीजा बणसी राजा ।
लाम्बा भाग लड़ीड़ भायला।
थारै जाया है अमर राजवी।
बाकीस पूरी छीड़ भायला।।
लागगी हाथां राज तळाई ।
लूंट रा कंठा बीड़ भायला ।।

हाइकू

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बुलावै फेसबुक
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2.
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घणां जचा'र आच्छा
मिलसी पाछा ।

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लेबा री देबा !

4.
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खुलम खुली बातां
बेली मोकळा ।

5.
बताओ आच्छी
थारी भी होसी आच्छी
अट्टै रो सट्टो ।

6.
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उगावै इश्क !

7.
मींत री भींत
खुली धरमसाळ
चेपो टैगड़ा ।

8.
पढणी कोनीं
कोई री कविता
धर कमेंट !

9.
ग़ज़ल ई है
आपां जो लिख दी
करो वा वा !

10.
बणग्या कवि
बतावै फेसबुक
टेको कमेंट ।
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