कागद राजस्थानी

शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

*बम बम कुदेव*



देस मेँ अब
देवां रो नीं
कुदेवां रो बास्सो है
अब हर हर री जाग्यां
डर डर उच्चारिजै ।
दिल्ली भी अब
बिल्लीबारी होयगी
इणीज कारण
चौगड़दै ऊंदरा थड़ी करै
बै तो अब
दरबार ताणीँ ढूकग्या
अर दरबारी
इणी डर मेँ सूकग्या !
नेतावां रा गाभा
धोळा ई हा
अब तो डील भी
धोळा होग्या
पै'ली सुणता कोनी हा
पण अब बोळा होग्या !

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