कागद राजस्थानी

शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

. *चित्तारा*






दोन्यूं आंख्यां में
धोबा धोबा काजळ सारै
पड़तख नै नीं चित्तारै
बजै पण चित्तारा
देखै मनभांवता उणायारा
अंतस री मिजळी आंख्यां
स्यात आं आंख्यां रो काजळ
अंतस री आंख्या ढूक
बिछायली कळमस री
हीणी-मिजळी जाजम !

चांदी वरणों सांच
देखसी कुण भळै
कठै सूं आयसी
कोरी सजळ आंख्यां !

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