कागद राजस्थानी

शनिवार, 21 जनवरी 2012

एक कविता

प्रीत

प्रीत पांगळी 
चालै हळवां
पकड़ आंगळी
कथी अलेखूं
मथी कहाणीं
निकळी कूड़
पूगी भागती
फगत ऐकली
पगां उभाणीं ।

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