कागद राजस्थानी

शनिवार, 21 जनवरी 2012

पंचलडी़

*बातां सरदी री *
दिनड़ा ताता रातां ठंडी ।
पै'रां सूटर छोडां बंडी ।।
छींयां सूती टांगां पसार ।
सूरज भाज्यो छोड बरंडी।।
ठंडा छोडो ताता खाओ ।
सूरज दे दी अब तो झंडी।।
खारक घेवर खाओ भाया ।
लेवण चालां चालो मंडी।।
पगां उभाणा मतना चालो।
चालो घर नै पकड़ो डंडी।।
घरां उडीकै थारी मरवण ।
सांमी आसी बणगै चंडी।।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.