कागद राजस्थानी

शनिवार, 21 जनवरी 2012

एक पंचलड़ी

*पंचलड़ी*
सांची बात खारी लागै ।
कूड़ी बात प्यारी लागै ।1।
साच नै ओ बतावै कूड़ ।
 
ओ माणस सरकारी लागै।2।
घाल कोठी ठाठ करै अब ।
पूरी खाल उतारी लागै ।3।
जनता रोवै भूखी तिस्सी।
आं नै आ हुंस्यारी लागै ।4।
नेता घरां नेता जामै ।
जनता अब बिचारी लागै ।5।

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