कागद राजस्थानी

बुधवार, 24 अक्तूबर 2012

चुप बैठ्यां नै बाळै क्यूं

* पंचलड़ी *
चुप बैठ्यां नै बाळै क्यूं ।
हक री हांती टाळै क्यूं ।।
बैठी मिनक्यां ले ताकड़ी ।
न्याव गूंगा भाळै क्यूं ।।
कुण सुणसी डोफा थांरी ।
बगत आपरो बाळै क्यूं ।।
लोकराज थरप्यो थारो ।
इतरो बै'मो पाळै क्यूं ।।
रोसणियां नै धूळ चटा ।
खुद री पाग उछाळै क्यूं
।।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...
इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.