कागद राजस्थानी

बुधवार, 10 अक्तूबर 2012

पिंड पाळै मन


काचै पिंड बैठ
पाका सुपना
मत देख मनड़ा !

बगत री फटकार
गुड़कासी पिंड
पिंड भेळा
गुड़कता सुपना
खिंडैला पिंड सूं पैली !

मोह री

काची मटकी
काचो पिंड
काचा सुपना
ऐतबार किण रो
काचा मन
थूं कद साचो ?

पिंड पाळै

मनड़ा थंन्नै
खुद री रुखाळी
जद लदसी खुद
थूं कियां बचसी
पिंड सूं बारै
इणी सारु
जोगी जोग रच
थंन्नै मारै !

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