कागद राजस्थानी

बुधवार, 10 अक्तूबर 2012

बजट रा दूहा

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मूंघीवाड़ो खायग्यो , जीवन्तड़ा री चाम ।
रोको थारा टैक्सड़ा , भली करैला राम ।1।
खरची ओछी बापजी , मतज बढ़ाओ दाम ।
सुण्यो बजट जद आपरो , पूठै लाग्यो डा'म ।2।
रोटी ओखी गांव में ,खट खट खोई चाम ।
भाड़ा बधग्या मोकळा , कूकर छोडां गाम ।3।
चुण चुण भेजां आप नै, आप चलाओ राज ।
ऐड़ी ठोको भोड में , आवै कथतां लाज ।4।
माया ममता छोडगै , झालो जन रो हेत ।
बाकी लखणां बापजी , धोळां पड़सी रेत ।5।

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