कागद राजस्थानी

रविवार, 2 जून 2013

पाटां माथै बात

*
गरमी कोझी रात नै , कळपै जीया जंत ।
घरां उडीकै कामणीं , पाटै सोवै कंत ।।
गरमी आळी रात में , पाटां घुटै बात ।
बातां बधै बात में , ओछी पड़ज्यै रात ।।
पाटां बै ठ्या कंत जी , बात बघारै भोत ।
घर में करतां कामड़ो , चटकै आवै मौत ।।
पाटै माथै रात नै , सोया कंत सुजान ।
गंडक सोया साथ में , तारां राख्यो ध्यान ।। 
भूखा मरता कंत जी, घर में आया भाग ।
भुजिया ल्याया हाथ में , रोटी मिली न साग ।।

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