कागद राजस्थानी

रविवार, 2 जून 2013

दीयो-बाट री कुचरणीं

दीयै सूं बाट बोली
बळूं म्हैं
नांव पण होवै थांरो 
कै दीया करै च्यानणों
थांरै नांव रो तो लोगां
त्यूंआर ई थरप दियो
जद कै म्हांरै सामनै
टिकै नीं अंधारो
पण थूं काढ नीं सकै
आपरै नीचै रो अंधारो
थूं कद करै च्यानणों
थूं तो अंधारो रुखाळै !

दीयो बोल्यो
थूं तो बावळी
तेल पीवै
तेल रै लालच में बळै
जको तेल थूं पीवै
बो म्हैं थांरै सारू साम्भूं
लोगां रा ओळमा सैऊं
कै दीयो तेल पीग्यो
थूं बुझे जद भी
म्हारो ई नांव लागै
कै दीयो बुझग्यो
थूं ई बता
म्हैं कद जगूं बुझूं ?
म्हांरै नीचै तो अंधारो
थांरी करड़ावण लारै है
थूं ऊपर ई ऊपर देखै
नीचै लुळै कद है ?

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