कागद राजस्थानी

शुक्रवार, 21 जून 2013

सबद ई रड़कै

कांकरी सी रड़कै
काळजै में
कुण या कांईं होसी
भीतर जाय सोधूं तो
स्यात लाधै
उथळीजूं पण किंयां
भीतर जाऊं किंयां !

भीतर सूं
आवै फगत सबद
सांसां रै घाल गळबांथ
बाअंडै रै सबदां सूं
करण बंतळ
अरथावै मनगत
दीठ रै सांकड़ै जगती में
सबद ई है स्यात
म्हारै भीतर-बाअंडै ।

सबद ई रड़कै
काळजै म्हारै
बिगसण
बरतीजण
अरथीजण ने हांफळता !

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