कागद राजस्थानी

रविवार, 2 जून 2013

ओळ्यूं रा सात चितराम

*ओळ्यूं-एक*

कित्ती भोळी होवै 
अचपळी ओळ्यूं
ठाह नीं कठै सूं 
हळवां-हळवां उठ
ढूकै भेजै
पछै जावै पसरती 
मन रै आंगणैं
आंख्यां रै ओळैदोळै
होवण पड़तख
बिलमावै मनड़ो
टिरै आंसूड़ां !

आंसूड़ा टिर्‌या
टिरता सूक्या
उण रै साथै ई
अदीठ होयगी
थिरती ओळ्यूं !

*ओळ्यूं-दो*

थांरी ओळ्यूं
कोरड़ू सरीसी
नित खदबदै
मन री हांडी
रड़कै आंख्यां
नीं सीजै
नीं पड़ै मगसी !

सोचां री थाळी
नित पुरसीजै ओळ्यूं
ठाह नीं किण हाथां
आंगळ्यां रै पळियै
म्हैं ई घालूं
आस रो घी
पण जावै नीं
ढीठ ओळ्यूं रै
कांकरां री किरकिराट !

*ओळ्यूं-तीन*

नांव थांरो
कदै नीं बिसरै
जे बिसरै ई तो
आंख्यां रै काच
नाचतो ई रैवै
थांरो उणियारो !

आंख्यां में भंवतो
थांरो उणियारो
थांरी ओळ री
इकलग ओळ्यूं
जाणै भींत माथै
ठोक्योड़ी कोई
अदीठ कील !

*ओळ्यूं-च्यार*

धोळै दोपारै
आभै में हेरूं
रात आळो
खांडियो चांद
दिखै ई नीं
समूळै आभै
घूम घाम'र
धरती री सींव
उतरै दीठ
मन मुळकै
हरखै अंतस ।

अंतस ओ रो हरख
मुळकतै मन री
आ ऊंडी थ्यावस
थांरी ई तो है
अखूट ओळ्यूं !

*ओळ्यूं-पांच*

ओळ्यूं कोई
सबक नीं है
किणीं पोथी रा
काळा आखर ज्यूं
जका बांच-बांच
ऊभी करल्यूं पड़तख
अदीठ होंवती नै
दीठ रै साम्हीं !

ओळ्यूं तो
रगत है
रगां में बैंवतो
जको मतै ई ढूकै
भेजै रै पड़
अर कोरै
थांरो उणियारो !

*ओळ्यूं-छै*

धोरां री पाळ
झाड़ बोरड़ी सांकड़ै
मीठा बोरिया खांवतां
अचाणक आयो
जाड़ तळै
एक खाटो बोरियो
आंख्यां रा काच थम्या
उथळीजण सारु जीभ
मठोठी खाई
पण आयो नी बारै
कोई आखर
कोई सबद
बा ओळ्यूं ई तो ही
थांरी अर थांरै नांव री !

*ओळ्यूं-सात*

आज भूख लागी
कीं खांऊं
मन कर्‌यो
कांईं खांऊं
आ विचारतां ई
साम्हीं आयो
ताती रोटी रो
घी सूं चिरच्यो
खांड आळो चूरमो
हिंवड़ै री दीठ
व्हीर होयगी
उण चूरमै लारै
बठै तो पड़त हो
मा थांरो मुंडो !

भूख अर चूरमै बिचाळै
जको कीं भंवै हो
बा ई तो ही
अदीठ ओळ्यूं !

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