कागद राजस्थानी

शुक्रवार, 21 जून 2013

*तंत*


धोळा काळा कर लिया,जवान होग्या कंत ।
गोडा ओज्यूं बूढिया , कोनीं आयो तंत ।। 
गोडा मांगै गेडियो, ऐनक मांगै आंख ।
लाल गाभा देखगै, डोकर काढै पांख ।।

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*सावण*

सावण आयो सायबा, मत ना जाओ दूर ।
सेजां पोढो आयनै, छोडो सगळा टूर ।।
तनड़ो सारो भीजग्यो, मनड़ो गावै गीत ।
साजन भेळा नाचल्यो , बणगै मन रा मीत ।।
अंबर गाजै बादळी, मनड़ै नाचै मोर ।
साजन म्हारा आंतरा ,रत्ती न चालै जोर ।।
आभै देखूं बादळा , हिवड़ै उपजै नेह ।
साजन होवै साथ मेँ , भळ बरसो थे मेह ।।
चंदै लिपटी बादळी , आभै देखूं भाज ।
घरां पधारो सायबा , काया छोडूं आज ।।

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