कागद राजस्थानी

शुक्रवार, 21 जून 2013

ताता-ताता दूहा

मिनखपणै रा बोरिया, बण्या भूंगड़ा आज ।
बिलखै जाई बेटियां , सूत्यो मिनख समाज ।।
धन कमावै रीत सटै, मुंडै न रत्ती लाज । 
धूड़ बरोबर तुल सकै, आंधो होयो समाज ।।


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बरफ पड़ी कसमीर में, धूजियो राजस्थान ।
धोरा होया हेमला , ठाठरगी ही जान।। ,

आपां पुतळी काठ री, नेता हाथां डोर ।
नाच दिखाओ भायला, चालै कोनीं जोर ।।


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बोट पड़ैला देसड़ै,नेता होर्‌या त्यार ।
बदळ खोळिया आवैला, गादड़ रंग लगा'र ।।
गादड़ बदळै खोळिया, मन में भूंडी धार ।
खेत रुखाळो भायलां, गादड़ देसी धार ।।
साम्भी नेता डुगडुगी, ढूंढै बांदर तीन ।
बोटां आळै बगत में , खूब जमैला सीन ।।
बण्या मदारी नेतिया, लीला दीवी राच ।
जनता भोळी बांदरी, खूब दिखावै नाच ।।
बोट पड़ैला भायलां , नेता चढग्या घोट ।
टाट बचाओ आपरी, ले सतगुर री ओट ।।
बोटां आळी बगत में, काढां सगळो खोट ।
राज सुंवारै आपणों, झाड़ू जेड़ो बोट ।।

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