कागद राजस्थानी

गुरुवार, 20 जून 2013

संगत (कुचरणीं)

रात नै मौड़ै 
टिल्ला खांवतो बेटो
घरां आयो तो बाप बोल्यो
थूं अजकाळै बिगड़'र
तीन कोडी रो होग्यो
इत्ती ना पीया कर
सुधरज्या
बुरी संगत छोड दे !

बेटो बोल्यो
थे ठीक कैवो बापू जी
ओ बुरी संगत रो ई असर है
म्हे छै भायला अर पांच बीयर
पांच साळा पीवै कोनीं
पांचां री म्हनै ई पीवणीं पड़ै
थांरी खरी-खोटी सुणनीं पड़ै
थे चिंत्या ना करो
आ बुरी संगत छोड देस्यूं
पांच सीसी पचावणियां सूं
नातो जोड़ लेस्यूं !

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