कागद राजस्थानी

गुरुवार, 20 जून 2013

*बीत्यो है बगत*

तारा टूटै आभै सूं 
आभो पण कदैई
रीत्यो नीं
बीत्यो है बगत
गिणतां-गिणतां तारा
गिणीज्या पण कद
नखत आभै रा सारा !

आपां सूं पैली भी
गिणता होसी लोग तारा
अब कठै है बै सारा
आभो तो आज भी है
अणगिणत तारां सूं
पळपळांवतो लड़ालूम !

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